कहीं पनघट पर पनिहारी, तो कहीं गलियों में मनियारी..., रत्नावली की हरियाणवी लोकभूषा स्पर्धा में हरियाणवी लोक परिवेश के विभिन्न रंग देखने को मिले।
विभिन्न कॉलेजों के प्रतिभागियों ने लोक परिधानों को मंच पर पेश किया। हरियाणवी लोकभूषा में सितारों से सजी चुनरी और रंग-बिरंगे घाघरों से सजी कलाकारों ने पनघट पर पानी भरने के अलग-अलग अंदाज पेश किए।
मनियारी के रूप में साज-सज्जा का सामान बेचने और बागड़ो की भूमिका में फेरी लगाने से लेकर कई अन्य पारंपरिक रिवायतों को भी इस विधा में प्रस्तुत किया गया। दुल्हन के स्वरूप और शृंगार को भी दर्शकों ने लुभाया।
बीपीएसएम यूनिवर्सिटी खानपुर कलां की टीम ने महिलाओं की लोकभूषा स्पर्धा में प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि एसडी महिला महाविद्यालय नरवाना की टीम ने दूसरे और डॉ. बीआर अंबेडकर कॉलेज कैथल की टीम तीसरे स्थान पर रही।
इसी विधा में पुरुष कलाकारों ने धोती-कुर्ते और रंग-बिरंगी पगड़ियां पहनकर प्रस्तुति दी। ज्यादातर कलाकारों ने किसान का रूप धारण किया हुआ था। धान की फसल काटता किसान, फसल की रखवाली करता किसान, खलिहान में पंछियों को उड़ाता किसान सबसे ज्यादा पसंद किए गए। हरियाणवी लोक परंपरा में दूल्हे के रूप को भी बेहतर तरीके पेश किया गया। इस विधा में सीआर किसान कॉलेज जींद की टीम प्रथम रही।
यूटीडी कुरुक्षेत्र ने दूसरा और पंडित चिंरजीलाल शर्मा राजकीय महाविद्यालय करनाल की टीम ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।