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‘केयू ने खत्म की अंग्रेजी की बाध्यता’

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केयू के सीनेट हॉल में सम्मानित किए गए साहित्यकारों के साथ मौजूद कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा व अन्य - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि केयू देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है, जिसने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वाले छात्रों के लिए उत्तर पुस्तिका में जवाब देने के लिए अंग्रेजी की बाध्यता को खत्म कर दिया है। विश्वविद्यालय के किसी भी माध्यम का विद्यार्थी अब अपने प्रश्नों के जवाब हिंदी माध्यम से दे सकता है। इसके साथ ही विधि विभाग के छात्रों के लिए हिंदी माध्यम की व्यवस्था भी की गई है।
कुलपति बुधवार को संस्थान के सीनेट हॉल में विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से आजादी का अमृत महोत्सव के तहत हिंदी दिवस पर ’विश्व में हिंदी का विकास‘ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। इससे पहले कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा, बुल्गारिया से मुख्य वक्ता प्रो. मोना कौशिक, गैब्रिएला मार्कोवा, प्रो. ब्रजेश साहनी, डॉ. महासिंह पूनिया ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कुलपति ने डॉ. शैल तिवारी की पुस्तक कामायिनी की आधुनिकता और डॉ. हरिकृष्ण द्विवेदी की पुस्तक रस कलश का विमोचन किया।
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केयू पहुंची सोफिया विश्वविद्यालय बुल्गारिया की प्रो. मोना कौशिक ने कहा कि विदेशों में हिंदी के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ रही है। विदेशियों को हिंदी पढ़ाना और बोलचाल की भाषा के रूप में हिंदी को विस्तारित करना किसी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन वर्तमान दौर में हिंदी भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व की भाषा बन चुकी है। ईरान की छात्रा शोराह ने हरिवंश राय बच्चन की कविता हिम्मत रखने वालों की कभी हार नहीं होती सुनाकर सबका मन मोह लिया।
बुल्गारिया से आई सोफिया विश्वविद्यालय की छात्रा ग्रैबिएला मार्कोवा ने वहां हिंदी के विकास और भारतीय फिल्मों की लोकप्रियता विषय पर प्रकाश डालते हुए बुल्गारिया से हिंदी में अनुवादित कविता का पाठ किया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. महा सिंह पूनिया ने कहा कि हिंदी करोड़ों लोगों की भावनाओं की अभिव्यक्ति की भाषा है। गूगल पर 10 लाख करोड़ पृष्ठ हिंदी के हैं। हिंदी वैश्विक रूप धारण कर चुकी है।
हिंदी विद्वान एवं दर्शन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. हिम्मत सिंह सिन्हा ने कहा कि केयू भारतीय संस्कृति एवं हिंदी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय देश का ऐसा पहला विश्वविद्यालय है जिसने हिंदी माध्यम से विधि विभाग के पाठ्यक्रम को लागू करने की पहल की है।
इस अवसर पर प्रो. ब्रजेश साहनी, आईआईएचएस के प्राचार्य डॉ. संजीव गुप्ता, डॉ. सीआर जिलोवा, डॉ. हरिओम फुलिया, डॉ. अनिता दुआ, डॉ. रीटा दलाल, डॉ. कुसुमलता, डॉ. महाबीर रंगा, प्रो. परमेश कुमार, डॉ. रजनी गोयल, डॉ. आनंद, डॉ. रामचंद्र सहित अनेक शिक्षक, साहित्यिक विद्वान व विद्यार्थी मौजूद रहे।
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इन्हें किया गया सम्मानित
इससे पूर्व अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. ब्रजेश साहनी ने कहा कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में 125 से अधिक विदेशी छात्र अध्ययन के माध्यम से यहां की भाषा एवं सांस्कृतिक परंपराओं का ज्ञान ले रहे हैं। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. सोमनाथ ने प्रो. हिम्मत सिंह सिन्हा, डॉ. उषा लाल, प्रो. भीम सिंह, हरिकृष्ण द्विवेदी, दिनेश दधीचि, डॉ. शैल तिवारी, डॉ. कामराज, रतन चंद सरदाना, प्रो. मोना कौशिक, डॉ. प्रशस्यमित्र शास्त्री, गैब्रिएला मार्कोवा व ईरानी छात्रा शोराह को सम्मानित किया।
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