29 मई को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह जब कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में शिरकत करेंगे, तब यहां साइंस और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। दीक्षांत समारोह के दौरान केयू के भव्य श्रीमद्भगवद् गीता सदन सभागार में तैत्तिरीय उपनिषद और गीता के श्लोक गूंजेंगे। निश्चित रूप से केयू के 30 वें दीक्षांत समारोह में विशुद्ध भारतीय ड्रेस कोड के साथ गीता के श्लोकों के उच्चारण की यह परंपरा केयू के नये अध्याय के रूप में जुड़ने जा रही है।
60 साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने जिस शिक्षण संस्थान को संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित किया था, वह मल्टी फैकल्टी यूनिवर्सिटी बनने के बाद अपनी पुरानी रिवायतों को भूलने लगी थी। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. कैलाश चंद्र शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की स्थापना संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में हुई थी। उन्होंने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है और इसे संस्कार की भाषा का सम्मान प्राप्त है। शिक्षण केंद्रों में शिक्षा के साथ संस्कार विद्यार्थियों का संपूर्ण विकास करने के साथ राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी श्रेष्ठतम शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और संस्कार का केंद्र बना रहे इसके लिए भुलाई गई परंपराओं से जुड़ने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने बताया कि तैत्तिरीय उपनिषद में श्लोक हैं शिक्षावल्ली। शिक्षा प्राप्त करके जब शिष्य घर लौटता है तो गुरु उसे सत्य और कर्तव्य के साथ जीवन में बेहद उपयोगी गुरमंत्र देता है। तैत्तिरीय उपनिषद में शिक्षावल्ली के यही पहली बार केयू के दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनने जा रहे हैं।
गौण होती गईं पुरानी परंपराएं
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के सेवानिवृत्त पूर्व शिक्षक एवं वयोवृद्ध शिक्षाविद् डा. हिम्मत सिंह सिन्हा के मुताबिक करीब 25 साल पहले कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के दीक्षांत में जब डीन अनुमति देता था तो उस दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण की गूंज सुनाई देती थी, मगर बाद में संस्कृत यूनिवर्सिटी की तरह ये परंपरा भी गौण होती चली गई। बताया गया है है कि देश में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ही एकमात्र ऐसा शिक्षण केंद्र है, जिसकी डिग्री संस्कृत और अंग्रेजी भाषा में प्रिंट होती है।
ये भी है एक संयोग
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के श्रीमद्भगवद् गीता सदन में करीब 2200 से अधिक लोगों के बैठने की क्षमता है। दीक्षांत समारोह में जहां गीता के 18 श्लोकों के अलावा तैत्तिरीय उपनिषद के श्लोक गूंजेंगे। ये भी संयोग है कि गीता और तैत्तिरीय उपनिषद की रचना महाभारतकालीन कुरुक्षेत्र की भूमि पर हुई है, मान्यता है कि तैत्तिरीय उपनिषद की रचना गांव तितरम के आसपास हुई थी, जोकि वर्तमान में हरियाणा के जिला कैथल का गांव हैं।
केयू प्रशासन ने की शनिवार और रविवार की छुट्टी रद
29 मई को केयू में गृहमंत्री के आगमन से पहले जहां जिला पुलिस प्रशासन हरकत पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था में जुटा है, वहीं कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी प्रशासन ने शनिवार और रविवार की छुट्टी रद कर सभी टीचिंग और नान टीचिंग स्टाफ को ड्यूटी पर तैनात रहने के आदेश दिए हैं। दिनरात तैयारियों में जुटे केयू प्रशासन द्वारा रविवार को दीक्षांत समारोह की फुल रिहर्सल भी रखी गई है।