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किसान नहीं बदलेंगे अपना पंच और मंच, उसी पंच और मंच से होगी वार्ता: राकेश

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कुरुक्षेत्र की धरती न्याय और क्रांति की धरती है। कुरुक्षेत्र की धरती से विश्व को ज्ञान का प्राप्त हुआ। यहां के लोग क्रांतिकारी है और इसी धरती से किसानों के साथ भी न्याय होगा। ये शब्द भाकियू (रजि.) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने गुमथलागढ़ू की अनाजमंडी में किसान महापंचायत कार्यक्रम में कहे। पंचायत के माध्यम से उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण ही आज किसान कर्ज के बोझ तले हुआ है। जब किसान की फसल के भाव में बढ़ाने की बात होती है तो उसमें मात्र 20 प्रतिशत बढ़ौतरी की जाती है, लेकिन सांसद और विधायक के वेतन में 500 प्रतिशत वृद्घि होती है। उस दौरान पक्ष और विपक्ष का कोई भी नेता विरोध नहीं करता है। उन्होंने कहा कि सरकार से बातचीत करने के लिए 40 किसान नेताओं का कमान सौंपी गई है। इन किसान नेताओं का फैसला ही उनके लिए सर्वोपरि होगा। सरकार चाहे कोई भी निर्णय ले, लेकिन किसान अपना पंच और मंच नहीं बदलेंगे। उसी पंच और मंच से वार्ता होगी। सरकार लगातार किसान आंदोलन को दबाने के लिए साजिश रच रही है। कभी सरकार कहती है कि यह आंदोलन पंजाब है, कभी कहती है यह आंदोलन हरियाणा-पंजाब है तो कभी किसानों को खालिस्तानी कहकर बदनाम करती है, लेकिन देश के किसान सरकार को बता देंगे यह आंदोलन देश के प्रत्येक किसान का है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि शीघ्र ही कर्नाटक, सिक्किम, तमिलनाडु, आंद्र प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों से 40 लाख ट्रैक्टर दिल्ली पहुंचेगे। इस लड़ाई को जीतने के लिए धैर्य, विश्वास और अनुशासन की जरूरत है। इस मौके पर हरेंद्र सिंह लखोवाल, टेकचंद कंडेला, मलूक सिंह, पंजाबी सिंगर रुपिंद्र हांडा, रामफल कंडेला, जसतेज संधू, पूर्व आईपीएस रणबीर शर्मा सहित किसान नेता मौजूद रहे।
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भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव युद्घवीर सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन से सरकार की चूले हिली हुई है। सरकार आंदोलन को फेल करने के लिए कोई जयचंद ढूंढ़ रही है, लेकिन सरकार को पता नहीं है कि किसानों में कोई जयचंद नहीं है। सरकार को दिल्ली आंदोलन के में किसानों की लाखों की संख्या से तसल्ली नहीं हुई है। सरकार करोड़ों में संख्या आंदोलन में देखना चाहती है। सरकार की इस चाहत को जल्दी पूरा किया जाएगा।
राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार के खिलाफ लड़ाई लंबी चल सकती है, इसलिए सभी किसानों को सहयोग करना होगा। अब किसानों को तिहरी ड्यूटी देनी होगी। किसान का एक पांव खेत रहेगा, एक पांव घर रहेगा और उसके साथ-साथ दिल्ली आंदोलन में भी भागीदारी निभानी होगी। इसके लिए गांव में कमेटी का गठन करना होना और किसानों को निर्णय लेना होगा कि कम से कम 5-8 दिन दिल्ली आंदोलन में हिस्सा जरूर लेना है।
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3 बजे राकेश टिकैत गुमथलागढ़ू पहुंचे थे। उनके काफिले में 10 गाड़ियां शामिल थी। यहां पहुंचते ही कई किसानों ने उनका जोरदार स्वागत किया। जीना, मुंदरी, शाईना, बिल्लो व नूरी घोड़ियों ने राकेश टिकैत के काफिले की अगुवाई की। इन घोड़ियों पर सवार युवकों ने राकेश टिकैत को चार मिनट वमें कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाया था।
इस किसान महापंचायत में चढ़ूनी ग्रुप का कोई नेता शामिल नहीं हुआ। हालांकि अनाजमंडी में कई वाहनों पर भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी ग्रुप के झंडे लगे हुए थे, लेकिन ग्रुप का कोई नेता पंचायत में शामिल नहीं हुआ था। जबकि कार्यकसरम के शुरू होने तक गुरनाम सिंह चढ़ूनी के कार्यक्रम में शामिल होने की अटकले लगाई जा रही थी।
इस किसान महापंचायत में प्रदेश भर से किसानों ने हिस्सा लिया। सात हजार से ज्यादा किसानों ने महापंचायत में हाजिरी दर्ज कराई। कुरुक्षेत्र स्थित गुरुद्वारा छठी पातशाही की ओर से लंगर की सेवा की गई।
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