कुरुक्षेत्र। किरमिच गांव का इतिहास 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध से जुड़ा है। इस गांव ने युद्ध के दौरान देशभक्ति की एक अनूठी मिसाल पेश की थी। साल 1965 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को गांव की चौपाल में बुलाया गया था।
उस जनसभा में ग्रामीणों ने सैनिकों के हाथ मजबूत करने के लिए गहने और चांदी दान की। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को करीब 89 किलोग्राम चांदी में तौला गया था। इस योगदान से तीन लड़ाकू विमान खरीदे गए थे। गांव के बुजुर्ग रामस्वरूप ने बताया कि उन विमानों पर डोनेटेड बाय विलेज किरमिच लिखा गया था। ये विमान पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में इस्तेमाल हुए थे। उस समय देश युद्ध के दौर से गुजर रहा था। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सहयोग की अपील की थी। उनकी अपील के बाद गांव की महिलाओं ने अपने गहने उतारकर दान करने शुरू कर दिए। ग्रामीणों ने चांदी को ताखड़ी में रखकर तीन बार तौला था। इस अभियान में बाबू राम सरपंच, सावण राम सरपंच और जय सिंह सरपंच सहित अनेक ग्रामीणों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जगती राम पंच, मातू राम जांगड़ा पंच, हरिसिंह, करता राम और लाल सिंह लंबरदार भी शामिल थे। देशहित में इस योगदान के बाद किरमिच का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ। बाद में गांव के प्रतिनिधियों को प्रधानमंत्री कार्यालय में बुलाया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात भी की थी।
गांव में करीब 25 एकड़ भूमि पर लगाया गया है फलों का बाग
ग्रामीणों के अनुसार केंद्र सरकार ने गांव के विकास के लिए कई योजनाओं को मंजूरी दी। गांव में करीब 25 एकड़ भूमि पर आधुनिक फलों का बाग स्थापित किया गया। इसे उस समय क्षेत्र की एक बड़ी विकास परियोजना माना जाता था। गांव का युवा चंद्रभान वर्मा सीमा सुरक्षा बल में ड्यूटी के दौरान शहीद हुआ था। उनकी याद में गांव में एक मूर्ति स्थापित की गई है।
फाइटर जेट पर लिखा था डोनेटेड बाय विलेज किरमिच
पूर्व न्यायाधीश श्याम लाल और गांव के बुजुर्ग रामस्वरूप ने बताया कि इंदिरा गांधी को गांव की महिलाओं ने अपने पैरों और कानों की चांदी निकालकर दे दी थी। इससे तीन लड़ाकू विमान खरीदे गए थे, जिन पर डोनेटेड बाय विलेज किरमिच लिखा था। रामस्वरूप ने बताया कि वह उस समय इन विमानों को देखने भी गए थे। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी को सरकारी स्कूल में चांदी से तौला गया था। उस समय पूरा गांव देशहित में सहयोग के लिए आगे आया था। श्याम लाल ने बताया कि गांव को ग्रीन कार्ड भी दिया गया था, जिससे ग्रामीण कभी भी पीएमओ जाकर प्रधानमंत्री से मिल सकते थे।
गांव ने हमेशा देशभक्ति का परिचय दिया : सरपंच
गांव के सरपंच चौधरी रनबीर सिंह का कहना है कि उनके गांव का इतिहास हमेशा से गौरवशाली रहा है। उन्होंने बताया कि युद्ध के समय ग्रामीणों ने दिल खोलकर चांदी दान की थी, जबकि अकाल के समय गांव से तीन ट्रक अनाज सरकार को भेजा गया था। उनका कहना है कि गांव ने समय-समय पर देशहित के कार्यों में बढ़-चढ़कर योगदान दिया है। एक दौर ऐसा भी था जब गांव की महिलाएं देश सेवा के लिए अपने गहने तक दान कर देती थीं।
सरकारी स्कूल में हुआ था आयोजन
गांव के बुजुर्ग चौधरी रामकुमार ने कहा कि हम उस समय काफी छोटे थे, तब गांव में मुनादी भी हुई थी, चौपाल में इंदिरा गांधी आई थी, वहीं उसके बाद उनको सरकारी स्कूल में ले जाया गया जहां उनको ताखड़ी में तौला गया था, उनको गांव की महिलाओं, पुरुषों ने चांदी उतार-उतार कर दे दी थी। उनका कहना है कि हमारे गांव के कई बुजुर्ग उस समय दिल्ली में इंदिरा से मिल कर भी आए थे।
कुरुक्षेत्र।इंदिरा गांधी के बारे जानकारी देते गांव के बुजुर्ग रामस्वरुप।संवाद
कुरुक्षेत्र।इंदिरा गांधी के बारे जानकारी देते गांव के बुजुर्ग रामस्वरुप।संवाद
कुरुक्षेत्र।इंदिरा गांधी के बारे जानकारी देते गांव के बुजुर्ग रामस्वरुप।संवाद