हालांकि कुरुक्षेत्र में जिला परिषद की चौधर को लेकर इतिहास रहा है कि हर बार इनेलो का ही चेयरमैन रहा है, लेकिन इस बार भाजपा प्रत्याशियों ने इनेलो को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि जिले में भाजपा और इनेलो के बीच सीधा मुकाबला रहा है, लेकिन कांग्रेस इस बार किंग मेकर की भूमिका में आ गई है। हालात ये हैं कि न तो भाजपा और न ही इनेलो अपने दम पर जिप चेयरमैन का चयन कर सकती है।
जिला कुरुक्षेत्र को 17 वार्डों में बांटा गया था। हालांकि जिला परिषद चुनावों में कोई भी पार्टी अपने चुनाव चिन्ह पर मैदान में सामने नहीं आई थी, लेकिन इनेलो और भाजपा के दिग्गजों ने जिला परिषद के चुनावों में पार्टी को लेकर खुला प्रचार किया था। प्रचार के दौरान इनेलो प्रदेशाध्यक्ष भी अपने पार्टी और पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के लिए खुलकर प्रचार में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर भाजपा की ओर से राज्यमंत्री कृष्ण बेदी, लाडवा के विधायक डॉ. पवन सैनी और थानेसर विधायक सुभाष सुधा भी अपने हलके में चुनावों को लेकर खुला प्रचार कर रहे थे।
हालांकि राज्यमंत्री ने सीधे तौर पर अपना कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा था, लेकिन भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की सपोर्ट खूब की थी। हालांकि उनके अपने विधानसभा क्षेत्र शाहाबाद में इनेलो की चौधर रही और कुछ ऐसा ही खेल लाडवा के भाजवा विधायक डॉ. पवन सैनी के विधानसभा क्षेत्र में भी रहा है। उनकी ओर से समर्थित दोनों प्रत्याशियों को हार का मुंह देखना पड़ा। वहीं, थानेसर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का सम्मान बरकरार रहा। यहां भाजपा के विधायक सुभाष सुधा ने दो प्रत्याशियों को खुला समर्थन दिया था। इनमें वार्ड 12 से गुरदयाल सुनेहड़ी ने जीत दर्ज की, जबकि दूसरे प्रत्याशी के रूप में इनेलो छोड़ कर भाजपा विधायक के साथ जुड़े वार्ड 13 से राजेश बारना की पत्नी रितु रानी विजयी रही है।
पार्टी दिग्गजों के खुले समर्थन के बाद वीरवार को आए चुनाव परिणामों ने जिप चौधर को अधर में लाकर खड़ा कर दिया है। हालांकि भाजपा के तीनों दिग्गजों राज्यमंत्री कृष्ण बेदी, विधायक सुभाष सुधा और विधायक डॉ.पवन सैनी का दावा है कि इस बार चौधर भाजपा के पाले में रहेगी और इनेलो का वर्चस्व टूटेगा। उक्त ने प्रेसवार्ता में दावा भी किया है कि भाजपा और भाजपा समर्थित 12 सदस्य चुनाव जीते हैं और बहुमत भाजपा का ही है। लेकिन, राजनीतिक गलियारों में चर्चा दूसरी ही चल रही है कि भाजपा का यह दावा गलत साबित हो सकता है। क्योंकि भाजपा के पास महज 7 ही सदस्य हैं, जबकि इनेलो के पास 6 सदस्य हैं।
ऐसे में इस बार जिला परिषद के चेयरमैन पद का फैसला केवल कांग्रेस ही करेगी। हालांकि वार्ड 5 से आजाद सदस्य है। वहीं, कांग्रेस के तीन सदस्य चुनाव जीत कर आए हैं और बिना उनकी मदद के कोई भी चेयरमैन पद पर दावा नहीं कर सकती। चौधर का ताज किसके सिर सजेगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना जरुर है कि चौधर पाने के लिए परिणामों के बाद ही सियासत गरमानी शुरू हो गई है। राजनीति विशेषज्ञों की मानें तो इस बार कुरुक्षेत्र जिप चौधर को लेकर खूब जोड़तोड़ करना पड़ेगा और कौन सी पार्टी जोड़ तोड़ करने में कामयाब होगी, यह आने वाला वक्त बताएगा ?