फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहीद संजीव सिंह आज 42 साल के होते

विज्ञापन
विज्ञापन
कारगिल युद्ध को 21 वर्ष बीत चुके हैं और आज कारगिल विजय दिवस है। मौका है उन शहीदों को याद करने का जिनकी कुर्बानी और देश भक्ति के जज्बे की बदौलत हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं। बता दें कि कुरुक्षेत्र के लाल एवं कारगिल शहीद संजीव सिंह ने 21 वर्ष की आयु में दुश्मन से लोहा लेते हुए देश की सरहद पर कुर्बानी दी थी।
विज्ञापन

शहीद संजीव सिंह आज अगर होते तो उनकी आयु 42 वर्ष होती। एक ईंट शहीद के नाम के राष्ट्रीय संयोजक संजीव राणा के मुताबिक करोड़ों भारतवासियों की सुरक्षा की खातिर अब तक हमारे ना जाने कितने ही जवान कुर्बान हो चुके हैं। मगर अफसोस तब होता है, जब हम ऐसे शूरवीरों की कुर्बानियों को भूल कर उनके परिवारों को दी गई चंद सुविधाओं को बहुत कुछ मान लेते हैं। उन्होंने बताया कि शहीद संजीव सैनी के पिता रणजीत सिंह सैनी से वे मिले थे। तब उन्होंने ही बताया था कि अपने शहीद पुत्र के नाम पर उन्होंने खुद ही कई वर्ष पहले धन खर्च कर कौलापुर गांव में शहीद संजीव सिंह स्मारक का निर्माण कराया था। हालांकि समय समय पर शहीद के परिवार के सदस्यों को अलग अलग सरकारी और गैर सरकारी मंचों पर सम्मान दिये जाने की परंपरा निभाई जा रही है,मगर यह दु:खद है कि खुद शहीद के परिवार के सदस्य लाखों रुपये खर्च कर स्मारक का निर्माण कराएं, जबकि यह जिम्मेदारी समाज या सरकारों की ही बनती है। बताया गया है कि संजीव सिंह की शहादत के के बाद सरकारों ने उसकी सुशिक्षित बहन को नौकरी देने का आश्वासन तो दिया, लेकिन आज तक उन्हें कोई नौकरी नहीं दी गई।
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तानी सेना और कश्मीरी उग्रवादियों ने जम्मू-कश्मीर के कारगिल क्षेत्र में नियंत्रण रेखा पार कर भारत में घुसपैठ कर कब्जे का प्रयास किया था। भारत के नियंत्रण वाले क्षेत्र से घुसपैठियों को खदेड़ने के लिये भारत और पाक में मई से लेकर जुलाई माह तक युद्ध चला था। इस दौरान कुरुक्षेत्र जिला के गांव कौलापुर वासी भारतीय सैनिक संजीव सैनी ने मात्र 21 की आयु में कारगिल के द्रास सेक्टर में दुश्मनों से लोहा लेते हुए कई घुसपैठियों को मार गिराया था और शहीद हो गए थे। इस युद्ध के दौरान जुलाई की 26 तारीख भारतीय इतिहास में दर्ज हो गई और भारत ने पाक की नापाक कोशिश को युद्ध के मैदान में धराशाई कर दिया था। सर्व खाप महिला विंग खाप पंचायत की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष दहिया ने निंदा करते कहा कि यह चिंताजनक है कि हमारे शहीदों के परिवार के सदस्य उनके नाम पर बनने वाले यादगारी स्थलों के निर्माण पर धन खर्च करें। शहीद पूरे देश के होते हैं, एक परिवार के नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें