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Kurukshetra News: हाथ से तैयार बांस की वस्तुओं से असम के जैरूल को मिली पहचान

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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में बांस से बनी वस्तुओं को खरीदती महिला पर्यटक। स
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कुरुक्षेत्र। आर्थिक तंगी से जूझते हुए कुछ करने की ठानी तो बांस को ही रोजगार का सहारा बना लिया, जिससे न केवल आर्थिक हालात बदले बल्कि देशभर में अलग पहचान भी मिली। अपनी कुशलता के साथ बांस से तैयार की गई वस्तुओं को देशभर के मेलों में उतारा तो कामयाबी मिलती गई। यहां तक कि दो बार स्टेट अवार्ड भी मिले। आज उनकी कला की हर ओर सराहना की जा रही है। यह कहानी है असम के रायपुर गांव के 10वीं पास जैरूल हॉक की, जो अब अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के सरस मेले में अपनी शिल्पकला का प्रदर्शन करने पहुंचे हैं और यहां भी उनकी कला को देख हर पर्यटक हैरान है।
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वे बताते हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते दिक्कतों से जूझ रहे थे, लेकिन घर पर पड़े बांस को तोड़कर वॉल हैंगिंग तैयार किया तो गांव के लोगों ने काफी सराहना की। बांस से बनी कई वस्तुओं को तैयार कर आसपास के मेलों में उतारा तो पर्यटकों ने पसंद किया। देशभर में लगने वाले मेलों में हिस्सा लिया तो पर्यटकों की खूब वाहवाही मिली।


ब्रह्मसरोवर तट पर लगे मेले में जैरूल हॉक ने स्टॉल पर बांस से बनी ट्रे, फ्रूट टोकरी, वॉल हैंगिंग, टेबल लैंप, हैंगिंग लैंप, ट्रायंगल हैंगिंग, पानी की बोतल, भगवान गणेश और घरों के बाहर लगने वाला लेटर बॉक्स पर की गई उनकी कारीगरी का हुनर नजर आता है, जिसे देखकर हर पर्यटक ठहर सा जाता है। वे अब तक पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में लगने वाले मेलों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। ब्रह्मसरोवर तट पर उनकी ओर से लगाई गई स्टॉल पर 50 रुपये से लेकर सत्तर हजार रुपये तक का बांस से बना सामान मौजूद है।
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बांस के रोजगार से मिली पहचान : जैरूल
शिल्पकार जैरूल हॉक का कहना है परिवार की स्थिति अच्छी न होने के चलते बांस से कुछ सामान को तैयार किया तो लोगों ने खूब पसंद किया और देशभर के मेलों में उतारा तो पर्यटकों की ओर से खूब पसंद किया जाने लगा। कला का हुनर देखते हुए असम सरकार की ओर से दो बार स्टेट अवार्ड भी मिल चुका है, जिससे बांस की कला के कारण अब लोगों में विशेष पहचान बन पाई है। अब पारिवारिक स्थिति मजबूत हुई है और लोगों से सम्मान भी मिल रहा है। अब परिवार से जुड़ी 12 महिलाएं भी बांस से बनी वस्तुओं को तैयार करती हैं, जिससे उन्हें भी रोजगार मिला है।

कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में बांस से बनी वस्तुओं को खरीदती महिला पर्यटक। स

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