कुरुक्षेत्र। कथा के दौरान पूजा अर्चना करते श्रद्धालु।स्वयं
कुरुक्षेत्र। अमीन रोड स्थित पटियाला बैंक कॉलोनी के मनोकामना सिद्ध श्री शिव मंदिर के वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में करवाई जा रही श्री शिव महापुराण कथा में कथाव्यास आचार्य रमेश उनियाल(हरिद्वार) ने माता सती जन्म और हरि हर की जल क्रीड़ा उप प्रसंग भजनों सहित विस्तार से सुनाया।
व्यासपीठ से आचार्य रमेश उनियाल ने कहा कि माता सती का जन्म प्रजापति दक्ष और रानी प्रसूति की पुत्री के रूप में हुआ था, जो आदि पराशक्ति का अवतार थीं। दक्ष अपनी प्रजा के बीच एक सर्वशक्तिमान पुत्री चाहते थे, इसलिए उन्होंने भगवती की घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर देवी ने स्वयं सती के रूप में उनके यहां जन्म लेने का वरदान दिया। राजा दक्ष ने ब्रह्माजी की प्रेरणा से आदि शक्ति की आराधना की।
आदिशक्ति ने दक्ष को पुत्री के रूप में जन्म लेने का वरदान दिया। सती दक्ष और प्रसूति की पुत्री के रूप में अवतरित हुईं। माता सती बाल्यावस्था से ही भगवान भोलेनाथ की अनन्य भक्त थीं। उनके सत्यनिष्ठ आचरण और शिव को पति रूप में पाने की दृढ़ता के कारण ही उनका नाम सती पड़ा। नारद जी की सलाह पर दक्ष ने सती का विवाह भगवान शिव के साथ किया। सती दक्ष की अन्य सभी पुत्रियों में अलौकिक थीं और बचपन से ही दिव्य शक्तियां दिखाती थीं। कथा के दौरान सुनाए गए भजन भोले की जय जय...शिवजी की जय जय पर भक्तजन झूम उठे। आचार्य द्वारिका प्रसाद मिश्र, सौरभ शास्त्री, उज्ज्वल शर्मा, सौर्यांश तिवारी, सीताराम कश्यप, सुनील सिंगला, अश्वनी मित्तल, जसविंदर मांद्रा विशेष गर्ग, राहुल सिंगला, अनुज सिंगला और महिंदर खन्ना शामिल रहे।