परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण यात्री जान जोखिम में डालकर सहकारी समिति की बसों में सफर करने को मजबूर हैं। जिस कारण क्षमता से अधिक सवारी बस में होने के चलते कभी भी हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन यात्री भी क्या करें जब उनके पास कोई विकल्प नहीं। विभाग की ओर से कई रूटों पर बसें न होने या संख्या कम होने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में वह अन्य विकल्प से अपने गंतव्य की तरफ जा रहे हैं। परिवहन विभाग की यह लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। बावजूद इसके समस्या के समाधान की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
इन समिति की बसों में में सफर करने वाले लोगों का कहना है कि कुरुक्षेत्र से साढ़े सात बजे के बाद पिहोवा और झांसा रूट पर कोई बस सुविधा नहीं है। कोरोना से पहले इन रूट पर साढ़े नौ बजे के बाद भी बस की सुविधा थी, मगर कोरोना काल के बाद यह सुविधा बंद हो गई। पिछले दो साल से उनको अपने गंतव्य की ओर जाने के लिए लटक कर और छत पर बैठकर सफर करना पड़ रहा है।
इन रूट पर बस चलाने को लेकर लोग कई बार परिवहन विभाग के अधिकारियों को मांगपत्र भी सौंप चुके हैं, मगर उस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। बता दें पिहोवा से कुरुक्षेत्र, गुहला-चीका, ढांड-पूंडरी और कुरुक्षेत्र से इस्माईलाबाद, झांसा व बाबैन रूट पर अधिकतर सहकारी बसें ही चलती है। आरटीए की ओर से सहकारी बसों को अधिक समय दिया गया है। वहीं रोडवेज कर्मी भी बसें चलाने को तैयार हैं, मगर उसके एवज में उनको ओवरटाइम के अनुसार भुगतान मिलने की बजाय केवल रेस्ट दिया जा रहा है। इस वजह से रोडवेज कर्मी ड्यूटी के समय ही बस चला रहे हैं।
मौजूदा समय में कुरुक्षेत्र डिपो के पास बसों का टोटा है। यहां पर कुल 101 बसें है, जिसमें 85 बसें सरकारी तथा 16 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत चलती है, जबकि डिपो में 200 बसों का बेड़ा होना चाहिए। इसमें भी रोजाना चार-पांच बसें तकनीकी खराबी के कारण अपने रूट पर नहीं चलती है। इसके अलावा पिहोवा सब डिपो में 42 बसें है।
आरटीए उर्मिल श्योकंद ने बताया कि यातायात नियमों की अवहेलना करने पर बसों के चालान किए जा रहे हैं। इस बारे में वह बस संचालकों को जागरूक भी कर रही हैं, मगर उनका कहना है कि बसों में शाम को अंतिम बस में भीड़ ज्यादा होती है। इस वजह से लोग बस की छत पर सफर करते हैं। बताया कि इसे समस्या को लेकर कुरुक्षेत्र रोडवेज महाप्रबंधक को शाम के समय अतिरिक्त बसें चलाने की सिफारिश करेंगी।
द हरियाणा सहकारी परिवहन कल्याण समिति के सचिव जरनैल सिंह ने बताया कि शाम को आखिरी बस में अधिक भीड़ होती है। घर जाने की मजबूरी में लोग छत पर चढ़ जाते हैं, मगर जैसे-जैसे लोग बस से उतरते हैं व्यवस्था बन जाती है। इस बारे में वह लोग आरटीए से अतिरिक्त बस चलाने की मांग करेंगे।
यातायात प्रबंधक मुकेश कुमार ने बताया कि शाम को सात बजे रोडवेज की बसें पिहोवा, झांसा व इस्माईलाबाद रूट पर जाती है। फिर भी वह इसकी जांच करके समस्या का समाधान करने का प्रयास करेंगे।