कुरुक्षेत्र। पति की मौत के बाद लाइफ इंश्योरेंस क्लेम देने में आनाकानी करने वाली बीमा कंपनी को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कड़ा सबक सिखाया है। धनौरा जागीर गांव निवासी विधवा महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आयोग ने कंपनी को 7.50 लाख की बीमा राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित चुकाने के साथ 11 हजार रुपये हर्जाना देने के आदेश दिए।
aमहिला के पति ने लाडवा एसबीआई ब्रांच से स्मार्ट स्वधन प्लस पॉलिसी ली थी जिसमें सालाना 16,650 रुपये प्रीमियम जमा किया। 10 साल बाद 7.50 लाख की गारंटीड राशि मिलनी थी और पत्नी को नॉमिनी बनाया गया था। अक्तूबर 2021 में पति को पेट दर्द हुआ, पीजीआई चंडीगढ़ में क्रोनिक पैन्क्रियाटाइटिस डायग्नोज हुई। चिकित्सकों की रिपोर्ट के अनुसार बीमारी दाखिल होने से महज 10 दिन पहले शुरू हुई। उपचार के दौरान पति का निधन हो गया।
नॉमिनी पत्नी ने मेडिकल रिकॉर्ड सहित सभी दस्तावेज जमा किए लेकिन कंपनी ने क्लेम ठुकराकर सिर्फ एक प्रीमियम 16,650 रुपये लौटाए। कंपनी का तर्क था कि बीमारी 2018 से थी। आयोग की अध्यक्ष डॉ. नीलिमा सांगला, सदस्य नीलम व रमेश कुमार की पीठ ने पीजीआई रिपोर्ट व पॉलिसी लेते समय कंपनी की ओर से कराई मेडिकल जांच को आधार बनाते हुए कंपनी के दावे खारिज किए। आयोग ने कहा कि पॉलिसी जारी करते वक्त मेडिकल जांच कंपनी ने खुद की थी, इसलिए क्लेम से मुकरना सेवा में कमी है। कंपनी को 45 दिन में 7.50 लाख नौ प्रतिशत ब्याज व 11 हजार हर्जाना देना होगा।