खाद्य आपूर्ति विभाग में बड़े पैमाने पर चल रहे भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रहा है संबंधित विभाग के इंस्पेक्टर का सुसाइड प्रकरण। एक दिन पहले वायरल हुई वीडियो में भले उतने तथ्य सामने नहीं आए,जिससे उक्त प्रकरण तस्वीर साफ होती हो, लेकिन वीडियो के कुछ अंश जिला खाद्य आपूर्ति विभाग में मनचाही तैनाती के लिये लेनदेन और प्रताड़ना जैसे आरोपों को खुद इंस्पेक्टर आशीष डांगी ने मौत से पहले उजागर जरूर किये गये हैं। इस वीडियो के अलावा अमर उजाला को जो अहम जानकारी हासिल हुई है,वो एक राइस मिल से तीन साल पहले सरकारी चावल की कम हुई 32 गाड़ियों, जांच, एफआईआर, विभागीय कार्रवाई की ओर खींचकर ले जाती है। यह तथ्य सीधे तौर पर सुसाइड कर चुके इंस्पेक्टर के अलावा खाद्य आपूर्ति विभाग के दो इंस्पेक्टरों के बीच चल रही तनातनी और विवाद की अहम कड़ी है।
जिला खाद्य आपूर्ति विभाग के ही एक अधिकारी ने नाम ने छापने की शर्त पर अमर उजाला को इस सुसाइड प्रकरण के पीछे के साइड इंपेक्ट के बारे में जो जानकारी दी। उसके अनुसार जिस इंस्पेक्टर ने आत्महत्या की है, उसका व्यवहार काफी शालीन था। विभाग में उसकी छवि ठीक ठाक थी। वीडियो में जिन दो इंस्पेक्टरों का जिक्र किया गया है, उसमें से एक इंस्पेक्टर ने अपनी पत्नी और भाई के नाम से कुरुक्षेत्र में तीन साल पहले एक राइस शैलर चलाया था, जिसमें सरकारी धान लगी हुई थी, लेकिन तय अवधि में जब सरकार को चावल वापस करने की बारी आई तो उसमें से 35 गाड़ी कम मिली थी, इसके बाद इस मामले में ना केवल जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक अधिकारी की पत्नी और भाई पर एफआईआर दर्ज हुई थी, बल्कि कुछ समय के लिये उनके भाई को जेल में भी जाना पड़ा था। इस प्रकरण में सीधे तौर पर एक इंस्पेक्टर का यह संबंध भी बताया जा रहा है। वहीं अधिकारी ने बताया कि वीडियो में जिस दूसरे इंस्पेक्टर का नाम लिया गया है, उसने चावल की 32 गाड़ियों के गबन से संबंधित मामले में जांच की थी। इस इंस्पेक्टर ने जांच करते हुए आशीष डांगी के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की थी। इसका कारण यह बताया गया है कि खाद्य आपू
र्ति विभाग के जिस इंस्पेक्टर के परिवारजनों पर सरकारी चावल के गबन का मामला था। उसके खिलाफ कार्रवाई न होकर उनके बाद दूसरे नंबर जिम्मेदार आशीष डांगी के खिलाफ
विभागीय कार्रवाई और चार्जशीट जैसी कार्रवाई चल रही थी। अधिकारी ने वायरल हुई वीडियो से अलग उक्त जानकारी देते हुए बताया कि अब नया विवाद क्या है। इसके बारे में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन पुख्ता जांच में कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
बहरहाल जिला के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में तैनात इंस्पेक्टर का सुसाइड प्रकरण विभाग में चल रहे बड़े घोटालों के साथ उन तमाम गड़बड़ियों की की परते खोल सकता है,जो कि गुपचुप ढंग से होती हैं। क्योंकि जहरीला पदार्थ निगलने के बाद अस्पताल में उपचार के दौरान इंस्पेक्टर डांगी ने एक वीडियो रिकार्डिंग में जो कहा है,वह भी इस विभाग की पोल खोलने में काफी है। क्योंकि वीडियो में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे इंस्पेक्टर ने जहां अपने ही विभाग के एक डीएफएससी और दो इंस्पेक्टरों पर प्रताड़ना अन्य गंभीर आरोप लगाए हैं,वहीं कुरुक्षेत्र की मंडी में तैनाती के लिये 50 हजार रुपये देने की बात भी सामने आई है। फिलहाल यह वीडियो खुलकर सिस्टम के अनगिनत छेदों और भ्रष्टाचार की कहानी को बयां करती नजर आ रही है। हालांकि कुरुक्षेत्र के डीएफएससी नरेंद्र सहरावत इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहे हैं। डीएफएससी ने इस मामले को मृतक आशीष डांगी के समकालीन अधिकारियों के आपस के विवाद का मामला बताया है।
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आशीष आत्महत्या मामले से नहीं कोई संबंध: सहरावत
इंस्पेक्टर आशीष आत्महत्या मामले में वारयरल वीडियो के बारे में जिला खाद्य आपूति एवं उपभोक्ता मामले नियत्रंक नरेंद्र सहरावत ने कहा कि आशीष आत्महत्या मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। वीडियो में कही बात में कोई सच्चाई नहीं है। यह मेरे खिलाफ कोई साजिश रची जा रही है। आशीष अच्छा लड़का था। इस मामले में हम विभागीय जांच करेंगे।
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मामले में जांच जारी है: थाना प्रभारी
सिटी थाना प्रभारी जसपाल सिंह ने कहा कि मृतक इंस्पेक्टर आशीष डांगी की पत्नी की शिकायत पर डीएफएससी के तीन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अस्पताल में डॉक्टर द्वारा बनाए गए वीडियो में भी आशीष ने इन तीनों अधिकारियों का नाम लिया है। पुलिस द्वारा जांच जारी है जैसे-जैसे तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे हुआ था घटनाक्रम
मूल रुप से रोहतक वासी आशीष डांगी शहर के मोहन नगर में किराए के मकान में रह रहे थे। घटना की शाम लगभग पांच बजे वह घर पहुंचे थे। घर पहुंचते ही उसने मकान मालिक के लड़के को एक 10 हजार रुपये दिए थे। इसी दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई। उन्होंने आशीष मलिक को तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उनकी मृत्यु हो गई थी। मृतक आशीष डांगी की पत्नी अनु मलिक ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसके पति विभाग में उपनिरीक्षक के पद पर भर्ती हुए थे। अब वे निरीक्षक बन गए थे।