- अनाजमंडी में आयोजित प्रभु कृपा दुख निवारण समागम में उमड़े श्रद्वालु
संवाद न्यूज एजेंसी
लाडवा। दुनिया भर में जितने भी असाध्य रोग, कष्ट व समस्याएं हैं, जिन्हें चिकित्सक और वैज्ञानिक ठीक नहीं कर पाए वे सब भारतीय स्वदेशी चिकित्सा से संभव हो जाते हैं। स्वदेशी चिकित्सा का उद्गम आयुर्वेद व मां दुर्गा के अद्भुत पाठ से हुआ है। आज पूरा विश्व इसे जानने के लिए उत्सुक है क्योंकि यह विश्व की सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा है। मां दुर्गा के पाठ से दीन-हीन व्यक्ति धनवान बन गए तथा अनपढ़ महाविद्वान बन गए। जो मृत्यु की कगार पर खड़े थे वे स्वस्थ होकर महाशक्तिवान बन गए।
यह कहना है अनंतश्री विभूषित जगद्गुरु महाब्रह्मर्षि कुमार स्वामी का। वे यहां अनाजमंडी में आयोजित प्रभु कृपा दुख निवारण समागम में दूसरे दिन रविवार को उमड़े श्रद्वालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दैवव्यपाश्रय एक दिव्य अलौकिक विज्ञान है। इस ज्ञान का उपयोग जनकल्याण के लिए किया जाना चाहिए, व्यापार के लिए नहीं, यह किसी दुरुपयोग के लिए नहीं है। विदेशों में भी मिरेकल वंडर वाश के त्वरित सकारात्मक परिणाम देखने के बाद वहां के डाक्टर और वैज्ञानिक भी इसे मान्यता दे रहे हैं। इस औषधि का मूलाधार पर प्रयोग करने से तुरंत ही रोग समाप्त हो जाते हैं।
समागम में आसपास के राज्यों से आए श्रद्वालुओं, सामाजिक व धर्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों और विद्वानों ने उपस्थित होकर प्रभु कृपा ग्रहण की। समागम में अनवरत रूप से लंगर चलता रहा। समागम में कुमार स्वामी ने अवधान के माध्यम से श्रद्वालुओं को तत्क्षण दुख निवारण की कृपा प्रदान की। समागम में निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया, जिसमें रोगियों को निशुल्क औषध् वितरण भी किया गया।
जगद्गुरु महाब्रह्मर्षि ने कहा कि पूरे विश्व में 90 प्रतिशत महिलाएं यूटीआई रोग से ग्रसित हैं। इस आयुर्वेदिक दिव्य औषधि मिरेकल वंडर वाश में किसी भी प्रकार का केमिकल या साल्ट का प्रयोग नहीं किया जाता है अपितु इसमें पवित्र नदियों का औषधीय जल होता है। पश्चिमी देशों के समागमों में इस औषधि का प्रयोग करने के बाद श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव भी सुनाए। महाब्रह्मर्षि ने कहा कि जिसे आधुनिक विज्ञान कहा जाता है वह केवल ज्ञान है। मां दुर्गा कहती है कि मैं विज्ञान हूं। यह आधुनिक विज्ञान मां दुर्गा के विज्ञान की शक्ति के करोड़वें अंश के समान भी नहीं है। इससे बढ़कर न कुछ था, न है और न होगा। भगवान शिव ने मां दुर्गा की स्तुति करते हुए कहा कि आप परमात्माओं की परमात्मा हैं। अमेरिका, इंग्लैंड सहित दुनिया के विज्ञान संपन्न देशों के डाक्टर, वैज्ञानिक, राष्ट्राध्यक्ष मां दुर्गा के दिव्य पाठ और शक्ति को देखकर आश्चर्यचकित हो गए।