कुरुक्षेत्र। सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सेमीकंडक्टर चिप विनिर्माण क्षेत्र वैश्विक पटल पर अपनी विशेष पहचान बना रहा है। विश्व में कुछ ही देश हैं जो सेमीकंडक्टर तथा इलेक्ट्रॉनिक चिप का निर्माण कर रहे हैं जिसमें ताइवान 50 प्रतिशत निर्माण कर रहा है। नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में ताइवान, साउथ कोरिया, जापान, यूएस, नीदरलैंड, जर्मनी भी कार्य कर रहे हैं। भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, जो मुख्य रूप से डिजाइन पर केंद्रित है।
यह कहना है कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का। वे वीरवार को सीनेट हॉल में विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक विज्ञान विभाग और गुरुग्राम विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे। प्रो. सोमनाथ ने कहा कि यह एमओयू दोनों विश्वविद्यालयों के बीच पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने तथा शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के बीच उत्पादक नेटवर्किंग को बढ़ावा देगा।
हमें पता है कि इस समय औद्योगिक क्रांति-4.0 युग चल रहा है। समय के साथ नई टेक्नोलॉजी का विस्तार हुआ। पहली औद्योगिक क्रांति वर्ष 1752-1850 तक थी जिसमें स्टील इंजन बना और मशीनों द्वारा कार्य शुरू हुआ और दूसरा 1870-1920 जिसमें विद्युत चालित इंजन, स्टील, टेलीफोन, टेलीग्राफ आदि का आविष्कार हुआ। तीसरी औद्योगिक क्रांति 1950-1990 में हुई जिसमें बिग कंप्यूटर, इंटरनेट, टेलीकम्यूनिकेशन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं वर्तमान में चल रही चौथी औद्योगिक क्रांति में एआई, आईओटी, रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग, क्वांटम कंप्यूटर जैसी नवीनतम तकनीकों ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि नवीनतम तकनीक विकसित करने में उच्च कीमत, कौशलता का गैप एवं विशेषज्ञों की अनुपलब्धता बड़ी चुनौती है। केयू में स्थापित दो इंक्यूबेशन सेंटर द्वारा जल्द ही सेमीकंडक्टर एवं चिप उद्योग की दिशा में अपने कदम बढ़ाएगा। गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि पहले हमें सेमीकंडक्टर चिप के लिए अमेरिका, ताइवान, मलेशिया, चाइना की ओर देखते थे लेकिन वर्तमान में भारत इस क्षेत्र में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है।
प्रौद्योगिकी उन्नति का भविष्य माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भर : प्रो. नवकांत
राष्ट्रीय सम्मेलन में भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरू के शिक्षाविद एवं वैज्ञानिक प्रो. नवकांत भट्ट ने सत्र के मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता के तौर पर कहा कि प्रौद्योगिकी उन्नति का भविष्य माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भर करता है, जो चिप प्रौद्योगिकी पर केंद्रित है। उन्होंने एकीकृत सर्किट के अंतर्गत नैनो-आकार के उपकरणों के निर्माण पर विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जल्द ही, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स अंततः इंजीनियरिंग अध्ययन के सबसे प्रमुख क्षेत्रों में से विशेष रूप में उभरेगा, जिससे दुनिया भर में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरों की पर्याप्त मांग होगी।
सम्मेलन में प्राप्त हुए 140 शोध पत्र
केयू इलेक्ट्रॉनिक्स साइंस विभाग के अध्यक्ष प्रो. मुकेश कुमार ने दो दिवसीय संयुक्त सम्मेलन की रूपरेखा के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में 140 शोध पत्र प्राप्त हुए हैं। वहीं प्रो. सितेंद्र कुमार शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
केयू एवं गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने किया एमओयू साझा
सम्मेलन में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एवं गुरुग्राम विश्वविद्यलाय के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग और बढ़ावा देने के लिए एमओयू किया गया। एमओयू द्वारा ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा, जिससे दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग और बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही दोनों विश्वविद्यालयों के फैकल्टी एवं शोधार्थी, विद्यार्थी कैंपस में प्रशिक्षण, इटर्नशिप, सम्मेलन व सेमिनार आदि में भाग ले सकेंगे तथा शोध एवं अनुसंधान के लिए प्रयोगशालाओं का भी उपयोग कर सकेंगे।