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निर्दलीय पार्षद तय करेंगे ताज का चेहरा

Fri, 24 Jun 2016 01:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
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मतदान - फोटो : Desk
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नगरपालिका के नवनिर्वाचित पार्षदों को शुक्रवार को दोपहर 3 बजे नपा कार्यालय में शपथ दिलाई जाएगी और चेयरमैन व वाइस चेयरमैन का चुनाव अगली बैठक मेें होगा। हालांकि कुछ पार्षदों में दिनभर यह भ्रम बना रहा कि शायद शपथ के बाद चुनाव भी ना करवा दिया जाए और ऐसे में उनकी रणनीति बैठक का बहिष्कार करने की बनती रही।
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पार्षदों के भ्रम को दूर करते हुए एसडीएम हवा सिंह ने बताया कि प्रशासन की ओर से पार्षदों को केवल शपथ का ही नोटिस भेजा गया है और इस बैठक के एजेंडा में चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के चुनाव का कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने बताया कि 27 मई को पार्षदों के चुनाव का नोटिफिकेशन हुआ था और नियमों के मुताबिक एक माह के भीतर पार्षदों की शपथ करवाना जरूरी था इसलिए 24 जून की तिथि निश्चित की गई और शपथ ग्रहण के एक माह के भीतर उक्त पदों पर चुनाव करवा दिया जाएगा।

एमपी व एमएलए के वोट पर फंसा है पेंच
चेयरमैन पद के चुनाव में अब तक एमपी व एमएलए का वोट भी डाला जाता रहा है लेकिन इस बार इनके वोट को लेकर पेंच फंसा हुआ है। पूर्व विधायक अनिल धंतौड़ी ने कहा कि हाई कोर्ट के एक फैसले के अनुसार एमपी व एमएलए को इन चुनावों में वोट देने से वंचित कर दिया गया था। इस बारे जब एसडीएम से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जिस दिन चुनाव होगा उस दिन कानूनी जानकारों से बात करके फैसला लिया जाएगा।
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दोनों पक्षों के पास हैं सात-सात वोट  
सत्तारूढ़ भाजपा व विपक्षी कांग्रेस के पास इस समय सात-सात पार्षद हैं और पांच निर्दलीय पार्षदों के निर्णय पर ही आगामी चेयरमैन का भविष्य निर्भर करता है। स्थिति ऐसी बनी हुई है कि बाजी किसी ओर भी पलट सकती है। इसलिए सत्तारूढ़ खेमा कोई रिस्क न लेते हुए बचाव की मुद्रा में है और इस कारण ही अभी केवल शपथ ही करवाई जा रही है।

चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के लिए जोड़तोड़
 नगरपालिका के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनाव के लिए जोड़तोड़ का खेल चल रहा है। 19 पार्षदों वाली नगरपालिका में जीत किस खेमे की होगी, यह कहना मुश्किल है।
नगर पालिका में कुल 19 पार्षद हैं।

यदि एमपी और एमएलए के मत नहीं पड़ते तो जीत के लिए जरूरी 10 पार्षदों का समर्थन स्पष्ट रूप से किसी भी खेमे में दिखाई नहीं पड़ता। चुनावी नतीजों को देखकर तो यह लगता था कि गैर भाजपाई ही चेयरमैन की चौधर हासिल करेगा, लेकिन सत्ता पक्ष की मजबूती के चलते कई पार्षदों ने अपनी निष्ठा में बदलाव किया है। इससे पाशा अब किसी तरफ पलट सकता है।

आंकड़ों की लिहाज से देखा जाए तो भाजपा के केवल तीन कार्यकर्ता ही चुनाव जीत पाए थे। इनमें गीता रानी, राजदीप कौर व गुलशन कवातरा शामिल हैं, लेकिन चुनावी प्रक्रिया के दौरान ही भाजपा ने कांग्रेस के बलदेव सेठी और ज्ञान देवी को अपने पक्ष में कर लिया था। इस तरह भाजपा समर्थित पार्षदों की संख्या 5 पहुंच गई थी। जबकि कुल 16 सीटों पर घोषित उम्मीदवारों में से 11 को हार का सामना करना पड़ा था। चुनावों के बाद पूर्व नगरपलिका प्रधान सुरेंद्र शर्मा और पूर्व उपप्रधान तिरलोचन हांडा के भाई सतविंद्र हांडा ने भी राज्यमंत्री कृष्ण बेदी में अपना विश्वास व्यक्त किया था।

इस तरह भाजपा के खेमे में 7 पार्षद बिल्कुल पक्के दिखाई पड़ रहे हैं और स्पष्ट बहुमत के लिए 3 पार्षदों के समर्थन की दरकार है। हालांकि पार्षदों की जीत के अभिनंदन कार्यक्रमों में राज्यमंत्री के साथ कई अन्य पार्षद की भी स्टेज साझा करते देखे गए। इनमें टेक चंद शर्मा, जसबीर सैनी, बलदेव राज चावला, प्रवीण गुप्ता, नीलम साहनी शामिल हैं। लेकिन इस बात में शंका है कि वे पार्षद राज्यमंत्री की ओर से घोषित उम्मीदवार को अपना वोट देंगे या नहीं।

दूसरी ओर कांग्रेस के पूर्व विधायक अनिल धंतौड़ी व पूर्व नपा प्रधान हरीश कवातरा के नेतृत्व में ममता कवातरा, उषा गाबा, वीना कोहली, अजय कुमार, ललित भार्गव, बाला देवी, मेवा देवी अभी तक इस खेमे से दूरी बनाए हुए हैं और गेम बनाने में व्यस्त हैं।

पार्षदों की खरीदो-फरोख्त की चर्चाएं भी जोरों पर हैं। वर्तमान हालात को देखते हुए लगता है कि बाहर से फैसला कर व बहुमत जुटाने के बावजूद हाउस के अंदर जाने के बाद परिणाम विपरीत भी आ सकते हैं और शाहाबाद की राजनीति में ऐसा पहले भी हुआ है। इसलिए राज्यमंत्री कृष्ण बेदी अपने राजनीतिक अनुभव का लाभ उठाते हुए फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
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