कुरुक्षेत्र। एनीमिया मुक्त भारत अभियान को दो माह से ज्यादा का समय बीत चुका है। जिले में हुई दो महीने की जांच में 61 फीसदी लोगों में किसी न किसी स्तर पर हीमोग्लोबिन यानी रक्त की कमी पाई गई। इस दौरान कुल 52,303 लोगों ने खून की जांच कराई, जिसमें 20,340 लोग यानी करीब 39 फीसदी लोग स्वस्थ पाए गए।
उल्लेखनीय है कि विभाग की ओर से 100 दिन तक यह अभियान चलाया जाएगा। सितंबर तक चलने वाले अभियान के तहत जिले में कुल 4161 शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविर में छह से 59 माह, पांच से 10 साल, 10 से 19 साल, गर्भवती, स्तनपान कराने वाली और डब्ल्यूआरए (20 से 49 साल की महिलाएं) छह वर्ग के लोगों को जांच में शामिल गया है।
विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 9,824 लोग माइल्ड (जिनमें रक्त की मात्रा सात से 11 ग्राम) और 20,810 लोगों 40 फीसदी में माॅडरेट (सात से नौग्राम) के तहत दर्ज किए गए। इसके अलावा ढाई फीसदी लोग यानी 1329 गंभीर एनीमिया (सीवियर) से ग्रसित पाए गए। इनके साथ-साथ विभाग की ओर से कुल 2,188 एनीमिया ग्रस्त मरीजों को रेफर किया गया। उनको आयरन सुक्रोज की डोज लगाई गई। इसके अलावा 20,965 लोगों को उपचार दिया गया।
हड़ताल से अभियान पर पड़ा असर
कार्यक्रम में सहयोगी डॉ. प्रदीप नागर ने बताया कि एनएचएम कर्मियों की 22 दिन की हड़ताल से अभियान पर बुरा असर पड़ा था। इस दौरान जांच काफी धीमी गति से हुई थी, मगर कर्मियों के ड्यूटी पर लौटने से अभियान तेज गति से चल रहा है। सभी केंद्र पर लगातार जांच कराई जा रही है। केंद्र के साथ प्रतिदिन की रिपोर्ट भी साझा कर रहे हैं।
फोर-टी से एनीमिया पर प्रहार : डॉ. मनीषा सिंह
कार्यक्रम की जिला नोडल अधिकारी डॉ. मनीषा सिंह ने बताया कि एनीमिया से निपटने के लिए फोर-टी टेस्ट, ट्रीट, टॉक और ट्रैक (जांच, इलाज, जागरूकता, और निगरानी) से प्रहार किया जा रहा है। इसमें पहले टेस्ट, ट्रीट व टाॅक ही शामिल था, मगर अब चौथे टी यानी ट्रैक को जोड़ा गया है। फोर-टी में पहले लोगों की जांच, दूसरे में इलाज, तीसरे में जागरूकता और अंत में निगरानी की जा रही है।