अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर गांव जैनपुर जाटान में बरगद के पेड़ के नीचे रविवार को जाट समुदाय का धरना शुरू हुआ। धरने को लेकर गांव के लोगों में बेहद जोश दिखाई दिया। पहले से ही धरने के लिए निर्धारित किए गए इस गांव में आसपास के गांव से भी जाट समाज के लोग सुबह से ही पहुंचने लगे थे। जिला स्तरीय धरने के लिए लाडवा-रायपुर रोडान रोड पर गांव जैनपुर जाटान के बाहर एक विशाल बरगद के पेड़ की छांव में दरियां व तिरपाल बिछाई गई, जहां धरने पर बैठे लोग सुबह से लेकर देर सांय तक जमे रहे। धरने की अध्यक्षता अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष लाभ सिंह अंटाल घिसरपड़ी ने की। पहले दिन धरने पर करीब 60 लोग बैठे तो वहीं जैनपुर व आसपास के गांव के अन्य लोग भी वहां आते-जाते रहे। हालांकि देर सायं तक धरना शांतिपूर्वक चलता रहा, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस की एक टुकड़ी धरनास्थल के करीब ही तैनात रही।
जाट नेताओं लाभ सिंह घिसरपड़ी, बलदेव राठी व आशीष फौजदार ने धरनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों को धरना शांतिपूर्ण ढंग से चलाने का आश्वासन दिया। पत्रकारों से बात करते हुए जाट नेताओं लाभ सिंह घिसरपड़ी, बलदेव राठी व आशीष फौजदार ने कहा कि जाट समुदाय आरक्षण दिए जाने की मांग के साथ-साथ आरक्षण आंदोलन के दौरान जाटों पर बनाए गए झूठे मुकदमे वापिस लेने, आंदोलन के दौरान मारे गए जाट समुदाय के लोगों के परिवारों को मुआवजा व नौकरी देने, न्यायालय में जाट आरक्षण के मामले की जोरदार पैरवी करने, भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं के खिलाफ कारवाई करने, जाट आंदोलन के दौरान हुई तोड़फोड़ की एसआईटी जांच में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ कारवाई करने व सांसद राजकुमार सैनी द्वारा भड़काऊ ब्यानबाजी करने पर कानूनी कारवाई किए जाने की मांगों को लेकर धरना शुरू किया गया है।
इस अवसर पर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष टेकचंद हथीरा, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बलदेव राठी, प्रदेश सचिव आशीष फौजदार, युवा जिलाध्यक्ष राजीव खानपुर, जगमाल हलालपुर, रणबीर बुढा, अजमेर सिंह फौजी, विजय नंबरदार, राकेश धनौरा, जसबीर बरोट, रमेश हथीरा, मनोज नंादल, मंजीत संघौर, कृष्ण बुहावी व ईश्वर जैनपुर सहित अनेक लोग उपस्थित थे। बता दें कि रविवार को प्रस्तावित धरने को देखते हुए प्रशासन ने शनीवार को ही गांव जैनपुर जाटान में जाकर जाट नेताओं से लंबी बातचीत की थी। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने जाट नेताओं से धरने के बारे में जानकारी ली और उन्हें शांति से धरना देने के लिए कहा था।
धरना शुरू होते ही पहुंचे एसडीएम और डीएसपी
जैनपुर में पेड़ के नीचे धरना शुरू होने के कुछ समय के बाद एसडीएम सतबीर कुंडू व डीएसपी गुरमेल सिंह मौके पर पहुंचे। जहां उन्होंने धरनास्थल पर बैठे जाट नेताओं से बात की और शांतिपूर्ण ढंग से धरना देने के लिए अपील की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि धरने की आड़ में कोई शरारती व्यक्ति कानून को अपने हाथ में न ले।
500 पुलिस जवान लाडवा में रहे अलर्ट
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के धरने को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। प्रशासन ने धरने के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए लाडवा क्षेत्र में भारी पुलिस फोर्स की तैनाती की गई। धरनास्थल पर पुलिस की एक टुकड़ी तैनात रही तो वहीं करीब पुलिस के पांच सौ जवानों को लाडवा में अलर्ट पर रखा गया है। रविवार सुबह ही पुलिस फोर्स लाडवा थाना पहुंच गई थी। यहां सभी चौक व चौराहों पर पुलिस के जवान तैनात किए गए तो रिजर्व पुलिस जवानों को लाडवा में शिवाला रामकुंडी पर रोका गया है ताकि जरूरत पड़ने पर वे तुरंत मौके पर पहुंच सकें।
धरने पर बुर्जुगों ने संभाली कमान
जैनपुर में रविवार से शुरू हुए जाट समुदाय के धरने में समुदाय के बुजुर्ग लोगों का जमावड़ा रहा। धरने की कमान इन बुजुर्ग लोगों के हाथों ही दिखाई दी। फरवरी में हुए जाट आंदोलन में भी समुदाय के बुजुर्गों ने आंदोलन की कमान अपने हाथ में रखी थी जिससे लाडवा क्षेत्र में बंद व प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से हुए और किसी भी तरह की कोई घटना नहीं हुई थी। अब धरने पर भी बुजुर्गों के बैठने से धरना शांतिपूर्ण रहने की उम्मीद है।
धरनास्थल पर ही शुरू किया खाना बनाना
धरने पर बैठे लोगों के लिए दोपहर का भोजन व चाय आदि की व्यव्स्था धरनास्थल पर ही की गई है। धरनास्थल के पास ही तम्बू लगाकर भोजन बनाया जा रहा है ताकि धरना दे रहे लोगों को समय पर गर्म भोजन मिल सके। बुजुर्गों के लिए धरनास्थल पर हुक्के रखे गए हैं जिससे वे लोग हुक्का गुडग़ुड़ाते हुए आगामी रणनीति व सरकार के क्रियाकलापों पर नजर रख रहे हैं।
धरने पर शांति देख पुलिस को मिली राहत
धरना शुरू होने के समय पुलिस के जवान पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहे थे। धरना दे रहे जाट समुदाय के लोगों की शांतिपूर्ण धरने के आश्वासन के बाद पुलिस कर्मचारी भी ढीले पड़ते नजर आए। दोपहर होने तक पुलिस जवान धरनास्थल से कुछ दूर हट कर एक खेत में आम के पेड के नीचे जा बैठे और मौका देखकर वहां पड़ी चारपाइयों पर सुस्ताने के लिए लेट गए। मीडियाकर्मियों के वहां पहुंचते ही ये जवान सतर्कता दिखाने लगे।