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Kurukshetra News: दो ये मुर्दा दिलों में कोई जान भर दो...से जगाई देशभक्ति की अलख

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कुरुक्षेत्र। फतुहपुर ​स्थित आश्रम में कवि सम्मेलन एवं संगोष्ठी के तहत एकजुट समूह पदा​धिकारी एवं - फोटो : Archive
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरूक्षेत्र। सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन गुदगुदी जंक्शन समूह के साहित्यिक मंच अक्षरम् की ओर से गांव फतुहपुर के मातृभूमि सेवा मिशन आश्रम में सोमवार को संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में सामाजिक संस्थाओं की भूमिका विषय पर अंबाला, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर के साहित्यकारों ने विचार रखे और कवियों ने काव्य पाठ किया। इस अवसर पर कवि लाभ भारद्वाज ने शहीद-ए-आजम भगत सिंह की कुर्बानी को शब्दों में पिरोते हुए कोई मुझ पे एहसान कर दो ये मुर्दा दिलों में कोई जान भर दो की शानदार प्रस्तुति से साहित्यकारों में देशभक्ति की अलख जगाई।
सभापति गुलशन ग्रोवर के मार्गदर्शन में संगोष्ठी का शुभारंभ हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी (संस्कृति प्रकोष्ठ) पंचकूला के निदेशक डॉ. चितरंजन दयाल कौशल ने किया।इस अवसर पर कवयित्री वर्षा ने कविता सरकार अगर शरीर है तो सामाजिक संस्थाएं हैं नाड़ियां, मनीषा नारायण ने मुश्किलों के सामने क्यों सर झुकाना चाहिए, माधुरी शर्मा ने राष्ट्र नहीं बनता केवल ऊंची-ऊंची मीनारों से, कवि हरीश बंसल ने देश को आगे बढ़ाना है तो समाज को आगे आना होगा रचना की प्रस्तुति दी। समूह अध्यक्ष चंद्रमौलि गौड़ ने सचिव सुनील अंगीरस सहित अन्य पदाधिकारियों अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों का परिचय कराया। इसके बाद मिशन के विद्यार्थियों ने राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। डॉ. कौशल ने कहा कि राष्ट्र को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने में सामाजिक संस्थाओं के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मिशन के संयोजक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में सामाजिक संस्थाएं समाज को संगठित, जागरूक और सशक्त बनाकर महत्वपूर्ण आधारशिला रखती हैं। ग्रोवर ने कहा कि सामाजिक संस्थाएं वंचित वर्ग तक शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यावसायिक प्रशिक्षण पहुंचाकर नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाती हैं।
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प्रचार प्रसार प्रमुख श्याम जुनेजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम अधिकारी बलजीत चावला ने कहा कि सामाजिक संस्थाएं सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करते हुए नीतियों को जमीनी स्तर पर सफल बनाने में मदद करती हैं। संगोष्ठी में सूबेदार मेजर रविंद्र कौशिक, जगदीश गुलाटी, ललित चावला, रमेश सुखीजा, भागवत स्वरूप और मनीराम सैनी ने भी बात रखी। कार्यक्रम के अंत में पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया।
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