हिमाचल प्रदेश के नवनियुक्त राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अमर उजाला को बताया कि उन्हें विश्वास नहीं था कि उनको हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है।
सरकार ने उनको किसी प्रकार की पहले सूचना नहीं दी थी। उनको आठ अगस्त को फोन पर किसी व्यक्ति ने हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाने की सूचना दी, लेकिन उनको विश्वास नहीं हुआ। वे दिल्ली से कुरुक्षेत्र जाते समय घरौंडा के भाजपा कार्यकर्ताओं से बातचीत कर रहे थे।
देवव्रत ने कहा कि कुछ देर के बाद दूसरा फोन आया फिर तीसरा और चौथा। इस तरह फोन आते गए। मुझे यह सब मजाक सा लगा। फोन आने के बाद भी दिल ने गवाही नहीं दी कि उनको हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। जब फोन करने वाले से मैंने कहा कि क्यों मजाक कर रहे हैं भाई तो उन्होंने कहा कि मजाक नहीं कर रहे महामहिम जी आप टीवी चलाकर देखो।
टीवी चलाकर देखा तो पर उनको हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाने की टीवी पर पट्टी चल रही थी। उन्होंने बताया कि टीवी पर पट्टी देखने के बाद भी उनको विश्वास नहीं हुआ। आखिरकार शाम को एक जिम्मेदार व्यक्ति का मोबाइल पर फोन आया और उन्होंने उन्हें हिमाचल प्रदेश का महामहिम बनाने की सूचना दी गई। तब जाकर संतुष्टी हुई।
हिमाचल ही नहीं पूरे देश के अच्छे दिन आए
कुरुक्षेत्र।
हिमाचल प्रदेश के नवनियुक्त राज्यपाल आचार्य डॉ. देवव्रत दो दिन के दिल्ली
प्रवास के पश्चात सोमवार की शाम कुरुक्षेत्र गुरुकुल में पहुंच गए हैं। वे
मंगलवार को सुबह हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना होंगे। वहीं, उनकी सुरक्षा के
लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस की टीमें भी कुरुक्षेत्र में पहुंच गई हैं।
देर
शाम काफी संख्या में लोग डॉ. देवव्रत को बधाई देने पहुंचे। डॉ. देवव्रत ने
अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वह दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का
आभार व्यक्त करने के लिए गए थे। सभी शीर्ष नेताओं से मुलाकात हुई है। इस
दौरान कोई राजनीतिक विचार-विमर्श नहीं हुआ है।
यह मुलाकात महज औपचारिक थी।
दिन तो सभी के अच्छे आ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश ही नहीं, हरियाणा समेत पूरे
देश के दिन अच्छे आ चुके हैं।
हिमाचल प्रदेश से सुरक्षाकर्मी पहुंचे
नवनियुक्त
राज्यपाल आचार्य डॉ. देवव्रत की सुरक्षा के लिए सोमवार की शाम को हिमाचल
प्रदेश पुलिस की सुरक्षा कंपनी पहुंच गई है। उनकी सुरक्षा के लिए 65 पुलिस
कर्मियों की टीम पहुंची हैं। इसके अलावा राज्यपाल के वाहनों का काफिला भी
पहुंच गया है।
सुरक्षा कर्मियों की टीमें फिलहाल कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी
के गेस्ट हाउस में रुकी हुई हैं। जवान मंगलवार को सुबह गुरुकुल में
पहुंचेंगे और उसके बाद राज्यपाल को साथ लेकर हिमाचल प्रदेश की राजधानी
शिमला स्थित राजभवन के लिए रवाना होंगे।
आचार्य डॉ. देवव्रत का जोरदार स्वागत
घरौंडा। हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाने की घोषणा के बाद डॉ. आचार्य देवव्रत शुक्रवार को अनाज मंडी में स्थित सामुदायिक केंद्र में पहुंचे। जहां पर उनका सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के लोगों ने फूल मालाओं के साथ स्वागत किया।
अभिनंदन समारोह में राज्यपाल डॉ. आचार्य देवव्रत ने कहा कि गऊ माताओं की सुरक्षा के लिए केंद्र की सरकार काफी गंभीर है और जल्दी ही गऊओं की हत्या पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जाएगा। इसी के साथ-साथ भारतीय संस्कृति का प्रचार किया जाएगा। राज्यपाल आचार्य देवव्रत सोमवार को दिल्ली से कुरुक्षेत्र की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने घरौंडा का दौरा भी किया।
घरौंडा पहुंचने पर हलका विधायक हरविंद्र कल्याण, तरावड़ी के विधायक भगवानदास कबीरपंथी, शहर की सामाजिक संस्था आर्य समाज, आर्य वीर दल, शिव शक्ति मंडल, भाजपा मंडल, गऊशाला समिति, युवा बोलेगा व अन्य सामाजिक व धार्मिक संस्था के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
गुरुकुल में घुड़सवार पुलिसकर्मियों ने की अगुवाई, तो एनसीसी कैडेट्स ने दी सलामी
कुरुक्षेत्र। गुरुकुल के विद्यार्थियों और स्टाफ ने महामहिम आचार्य का जोरदार स्वागत किया। हिमाचल प्रदेश के नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य देर शाम दिल्ली से गुरुकुल पहुंचे।
गुरुकुल के अश्वारोहियों ने गुरुकुल द्वार से उनकी अगवानी की और एनसीसी कैडेट्स ने लेफ्टिनेंट श्रवण आर्य के नेतृत्व में अभिवादन किया। ब्रह्मचारियों ने पंक्तिबद्ध होकर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। आचार्य डॉ. देवव्रत की अर्धांगिंनी दर्शना देवी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ तिलक कर स्वागत किया।
आचार्य देवव्रत के दिल्ली से गुरुकुल में पहुंचने से पूर्व ही काफी संख्या में लोगों का आना प्रारंभ हो गया था। गुरुकुल में पिछले 35 वर्ष से कार्यरत आचार्य डॉ देवव्रत का स्वागत करने के लिए गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने विशेष व्यवस्था की थी।
इस दौरान गुरुकुल के अश्वारोहियों ने उनका गुरुकुल गेट से ही स्वागत किया और उनके काफिले की अगुवाई करते हुए उन्हें भीतर लेकर पहुंचे। इस दौरान दोनों ओर ब्रह्मचारियों ने पुष्पवर्षा करते हुए स्वागत किया।
इस अवसर पर गुरुकुल के प्रधान कुलवन्त सैनी, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री कमला वर्मा, गुरुकुल उपप्रधान राजेन्द्र कलेर, सुधीर शास्त्री, मास्टर सतपाल सिंह, पूर्व लोकसभा सांसद गुरदयाल सिंह सैनी, राजेन्द्र भारद्वाज, धर्मदेव विद्यार्थी, वीरेन्द्र आर्यवर्त, जगदीश आर्य, महासिंह पूनिया, कर्नल एच एस चौहान, राजेन्द्र विद्यालंकार, एडवोकेट लक्ष्मीकांत शर्मा, राकेश जैन, सहप्राचार्य गुरुकुल शमशेर सिंह, शैक्षिक प्रशासक गुरुकुल कँवरजीत आर्य, मुख्य संरक्षक संजीव आर्य, नन्दकिशोर आर्य, कर्नल प्रतापसिंह, डॉ. कैलाश अग्रवाल, मुख्यगणक गुरुकुल सतपाल आर्य, पुत्री मनीषा शास्त्री, पुत्र गौरव आर्य सहित सभी ने स्वागत किया।
मुझे एक-एक कण से लगाव
इस अवसर पर गुरुकुल के ब्रह्मचारियों को आशीर्वाद देते हुए आचार्य ने कहा कि परमात्मा पर पूर्ण विश्वास रखकर जो निरन्तर निष्काम भावना से कार्य करता है वह ईश निश्चित रूप से उसके योग और क्षेम का पूरा ध्यान रखता है।
आप सबको निरंतर पुरुषार्थ कर इस प्रकार की ऊँचाइयों को छूते रहना है। आचार्य देवव्रत ने विश्वास दिलाया कि मुझे गुरुकुल के एक-एक कण से लगाव है, आप पूर्ण विश्वास रखें हम सब मिलकर इस गुरुकुल को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का काम करेंगे।
परिवार ने शुरू की शपथ ग्रहण समारोह में जाने की तैयारी
हिमाचल प्रदेश के नवनियुक्त राज्यपाल आचार्य डॉ. देवव्रत के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए परिवार ने तैयारियां शुरू कर दी है।
बुधवार को शिमला के राजभवन में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में उनके परिवार के सदस्य भी शामिल होंगे। इन्हीं तैयारियों के बीच आचार्य के पुत्र गौरव आर्य और बेटी मनीषा ने अमर उजाला के साथ अपनी खुशियों को सांझा किया। पूरे घर में उत्सव का माहौल है।
पत्नी दर्शना देवी जो सदैव उनके साथ प्रत्येक शुभ कार्य में जुड़ी रहीं, उन्होंने कहा कि उन्होंने जीवन में अपने पति को सदैव दूसरों के लिए, समाज के लिए, युवाओं का मार्गदर्शन करने में ही खुश पाया है। उनके जीवन में खुशी का यह पल बहुत अहमियत रखता है।
पिता का राज्यपाल बनना सुनहरी पल : गौरव
उनके पुत्र गौरव आर्य ने बताया कि उन्हें स्वपन में भी इस बात का अहसास नहीं था कि उनके पिता को इतना बड़ा सम्मान मिलने जा रहा है।
यह उनकी कर्तव्य निष्ठा और सात्विकता का ही परिणाम है जो उन्हें संवैधानिक उच्च पद के लिए मनोनित किया है। उन्हें फख्र है कि वे इस महान विभूति की संतान हैं। गौरव ने कहा कि वह अपने पिता के महामहिम बनने के इस सुनहरी पल को जीवन पर्यंत स्मरण रखेंगे।
बेटी बोली, आदर्शों ने पहुंचाया इस पद तक
उनकी बेटी मनीषा ने खुशी बांटते हुए कहा कि यह उनके पिता की तपस्या और उच्च कर्म का ही परिणाम है जो उन्हें इस पद के लिए चुना गया है।
उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनके पिता को इतना बड़ा सम्मान मिलेगा। कल तक उनके पिता आचार्य थे और उन्होंने अपने पूरे जीवन में गुरुकुल के हजारों बच्चों का भविष्य बनाया है। उनके आदर्शों के कारण ही आज उनका सिर भी फख्र से ऊंचा हो गया है। मुझे गर्व है कि मैं उनकी बेटी हूं।