कुरुक्षेत्र। कार्तिक पूर्णिमा पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अल सुबह पवित्र ब्रह्मसरोवर में आस्था की डुबकी लगाई और पूजा अर्चना की। वहीं कार्तिक पूर्णिमा के चलते ही सोमवार देर रात तक श्रद्धालु यहां दीपदान करते रहे। कार्तिक पूर्णिमा का दिन हिंदू धर्म में काफी अहम माना गया है, इस दिन को देव दीपावली भी कहा जाता है। इसलिए इस दिन पवित्र तीर्थ स्थलों में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने यहां मोमबत्ती व दिए जलाए और पवित्र सरोवर में प्रवाहित किए।
जानकारी के अनुसार धर्मनगरी में दूर-दराज से श्रद्धालु सोमवार सुबह से ही ब्रह्मसरोवर तट पर पहुंचना शुरू हो गए थे। इससे दिन भर ब्रह्मसरोवर तट के आसपास मेले जैसा माहौल बना रहा। ब्रह्मसरोवर पर श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर पवित्र ब्रह्मसरोवर के जल में छोड़ा। वहीं केडीबी के कर्मचारी भी मेले की व्यवस्था को दुरुस्त करते रहे। मेले में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस कर्मचारी भी तैनात रहे। शहर की धार्मिक और सामाजिक संस्थानों की ओर से मंदिरों और मठों में पूजा-अर्चना और हवन यज्ञ किए गए और कई जगहों पर भंडारों का आयोजन किया गया।
पूर्णिमा तिथि सोमवार को दोपहर दो बजकर 45 मिनट तक रही : पंडित बलराज कौशिक
ज्योतिषाचार्य पंडित बलराज कौशिक का कहना है कि कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि सोमवार को दोपहर दो बजकर 45 मिनट तक रही। इस दिन स्नान दान का विशेष महत्व माना जाता है। शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा पवित्र तिथि मानी गई हैं। इस तिथि में किए हुए स्नान, दान, यज्ञ और उपासना का अनंत फल प्राप्त होता है। साथ ही इस दिन तीर्थ स्नान, गंगा स्नान और शाम के समय दीपदान का विशेष महत्व है। शाम के समय देव मंदिरों, चौराहों, गलियों और वृक्षों के नीचे दीप जलाए जाते हैं। इस दिन को देव दीपावली भी कहा जाता है।