कुरुक्षेत्र। अब विद्यार्थी वास्तविक मानव अंगों पर जीवनभर शोध कर सकेंगे। आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में शोध की दिशा में कदम बढ़ाते हुए श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय ने एक अनोखी उपलब्धि हासिल की है।
विश्वविद्यालय के राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय के शरीर रचना विभाग ने मानव अंगों का सफल प्लास्टिनेशन कर दिखाया है। यह तकनीक आयुर्वेदिक शिक्षा के क्षेत्र में न केवल एक नई मिसाल पेश कर रही है, बल्कि यह विद्यार्थियों के अध्ययन और शोध के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
विश्वविद्यालय में चिकित्सकों ने दिल, किडनी, लीवर, बड़ी आंत, छोटी आंत के अलावा बकरी के फेफड़े, इंसान के शरीर की सबसे छोटी हड्डी जो कान में होती हैं उन्हें भी प्लास्टिनेट करने में सफलता हासिल की है, इसके अलावा दर्जनभर अंगों को प्लास्टिनेशन किया है। मानव अंगों का ये प्लास्टिनेशन पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। मानव अंगों का प्लास्टिनेशन ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए उन्हें लंबे समय तक संरक्षित रखा जा सकता है। इसे लेकर विभाग ने चार साल तक रिसर्च किया। पढ़ाई करने वाले छात्रों के शोध के लिए बॉडी की कमी रहती है। वहीं केमिकल के जरिए लंबे समय तक उसे रखना मुश्किल होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने प्लास्टिनेशन की दिशा में काम किया। संवाद