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मनुष्य जीवन केवल शरीर नहीं अपितु सोच, विचार, भाव, स्वभाव की है यथार्थ पहचान : स्वामी ज्ञानानंद

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शाहााबाद। प्रदेश के कृषि एवं पशु पालन मंत्री श्याम सिंह राणा को स्मृति चिह्न भेंट करते स्वामी ज
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शाहाबाद। महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद के सान्निध्य में श्री कृष्ण कृपा जीओ गीता की ओर से आयोजित किए जा रहे गीता ज्ञान अमृत उत्सव के तृतीय दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि मनुष्य जीवन केवल शरीर ही नहीं अपितु सोच, विचार, भाव, स्वभाव की यथार्थ पहचान है। शरीर दुर्योधन का भी वैसे ही पांच तत्वों का था जैसा अर्जुन का लेकिन सोच का अंतर, जिसके कारण अर्जुन आज भी युवाओं में प्रेरणा है जबकि दुर्योधन एक चेतावनी।
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अर्जुन दुख, शोक और विषाद में भी जीवन मूल्यों, आदर्शों और परंपराओं से समझौता नहीं करता जबकि दुर्योधन पूरा राज हाथ में लेकर भी सोच में हर समय अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, आवेश, छल-कपट ही भरे रखता है। उसका परिणाम है कि न तो दुर्योधन तब किसी का आशीर्वाद ले पाया और आज किसी भी दृष्टि से दुर्योधन का सम्मान नहीं है। राज्य के कृषि एवं पशु पालन मंत्री श्याम सिंह राणा मुख्यातिथि के रूप में सम्मिलित हुए। युवा भाजपा नेता गौरव बेदी, नगर पालिका बराड़ा के प्रधान रजत मलिक, पूर्व नगर पालिका प्रधान हरीश कवातरा, पूर्व नपा उप-प्रधान नीलम साहनी, पंचनद स्मारक ट्रस्ट के ब्लॉक प्रधान राजेश चावला व समाजसेवी राज सतीजा ने अति विशिष्ट अतिथि के तौर पर उत्सव में शिरकत की।
उन्होंने कहा कि गीता सोच को सकारात्मक और रचनात्मक रूप देती है। सकारात्मक सोच ही जीवन में उदारता और महानता की ओर ले जाती है। जीओ गीता की ओर से स्वामी ज्ञानानंद ने मुख्यातिथि, अति विशिष्ट अतिथि गण और तमाम यजमानों को सम्मानित किया। श्रीमद्भगवद्गीता जी की आरती के साथ गीता ज्ञान अमृत उत्सव के तृतीय दिवस का समापन हुआ। मुख्य यजमान अग्रवाल महासभा के पूर्व प्रधान नरेंद्र गर्ग डिंपू, संजीव अग्रवाल, पुनीत चड्डा, जिमी पोपली, प्रदीप करावा व सुरेश भारद्वाज ठोल ने गीता पूजन किया।
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मार्केट कमेटी के वाइस चेयरमैन त्रिलोचन सिंह हांडा, पार्षद विजय कलसी, प्रभजीत सिंह तनेजा जीता, ऋषि चावला, रजत आनंद, विजय मित्तल, राकेश गर्ग, सुल्तान सिंह रतनगढ़, डाॅ. हिमांशु अरोड़ा, राजेश प्रजापत, पप्पी गुंबर, बसंत ढींगड़ा, रघुवीर कश्यप, कुलदीप कुमार व प्रदीप कुमार अंबाला ने यजमान के रूप में स्वामी ज्ञानानंद का स्वागत किया।
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