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उम्मीदें टूटीं, बदहाली पर बहा रहा हूं आंसू

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संवाद न्यूज एजेंसी
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पिपली। मैं खंड पिपली का गांव मथाना हूं। सैकड़ों साल पहले मुझे बसाया गया था। आज मेरी आबादी करीब 10 हजार है और ज्यादातर लोग पढ़े-लिखे हैं। मेरे पास 100 एकड़ से ज्यादा जमीन है और मेरी सालाना आमदनी भी करीब 60 लाख रुपये है। आमदनी की अन्य व्यवस्था भी है, इसके बावजूद मेरा उम्मीद के अनुसार विकास नहीं हो पाया है। मैं अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा हूं।
मुझे अपने विकास की आज भी दरकार है। मेरे सात आंगनबाड़ी केंद्र हैं और मैं लोगों के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखता हैं। मेरे यहां 35 बेड का सरकारी अस्पताल भी है। इसके अलावा होम्योपैथिक व आयुर्वेदिक डिस्पेसरी भी है। मेरे चारों तालाबों की साफ सफाई कभी कभार की जाती है, कई बार साफ सफाई नहीं होने से मेरे अंदर गंदगी पसर जाती है और चारों तरफ बदबू फैल जाती है।
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गलियां और नालियां टूटी पड़ी हैं। मैने अलग-अलग सरकार में बड़े राजनेता व अधिकारी भी दिए बल्कि कई विभागों में आज भी मेरे दिए बड़े अधिकारी आज भी प्रशासन में बैठे हैं लेकिन मेरी दशा में कोई ज्यादा सुधार नहीं हुआ। मेरे अंदर खास बात यह है कि यहां सभी वर्गों के लोग भाईचारे के साथ रहते हैं और एकता का परिचय देते हैं।
खंडहर भवन बना नशेड़ियों का अड्डा
ग्रामीण महेंद्र सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग का जो खंडर रिहायशी भवन है, उसमें गंदगी पसरी है और लोग वहां शौच आदि के लिए जाते हैं। नशेडिय़ों ने इस खंड्हर भवन को अपना अड्डा बना लिया है और कई युवा नशे की तरफ जा रहे हैं। इसकी तरफ प्रशासन व सरकार को ध्यान देना चाहिए।
टूट रही है गलियां और नालियां
रूबल शर्मा बताते हैं कि गलियों का लेवल सही नहीं होने के कारण नालियां गंदगी से अंट जाती है और ओवरफ्लो होकर दूषित पानी व गंदगी गलियों में पसर जाती है। इससे गलियां टूट गई हैं। यहां ज्यादातर लोग साक्षर हैं। कई विभागों में गांव के लोग उच्च पदों पर हैं और कईयों ने अपना कारोबार भी चला रखा है।
सीएचसी में अल्ट्रासाउंड, एक्सरे नहीं
इंद्राज पाल ने कहा कि गांव के खेल मैदान में समय समय पर खेल गतिविधियां करवाई जानी चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि गांव के को-ऑपरेटिव बैंक (पैक्स) को पिपली से अलग कर मथाना में किया जाए। यहां सीएचसी में अल्ट्रासाउड मशीन, एक्स-रे व पीएम हाऊस आदि सुविधाएं दी जाएं, ताकि ग्रामीणों को शहरों में नहीं भटकना पड़े।
गांव में कई सुविधाएं कस्बों से ज्यादा
निवर्तमान सरपंच प्रतिनिधि तेजपाल ने कहा कि उन्होंने गांव में अनेक विकास के काम करवाए गए। शमशान घाट का रास्ता बनवाया। सार्वजनिक भवन निमार्ण करवाया जिसका लोग लाभ रहे हैं यदि सरकार गांव में कोई बड़ा प्रोजेक्ट लगाना चाहती है तो गांव की तरफ से हर संभव सहयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बड़े कस्बों से ज्यादा कई सुविधाएं गांव में हैं।
भवन किसी काम नहीं आए
ग्रामीणों से मिली जानकारी अनुसार करीब 17-18 साल पहले गांव में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर्मचारियों के लिए रिहायशी भवन बनाए गए थे, जिनपर करोड़ों रूपए खर्च किए, लेकिन इन भवनों का कोई प्रयोग नहीं किया गया और बाट देखते देखते ये खंड्हर भवन में बदल गए।
गांव में ये हैं सुविधाएं
गांव में सात आंगनबाड़ी केंद्र , 66 केवी का पॉवर हाउस, योगाश्रम, अंबेडकर भवन, 35 बेड का सरकारी अस्पताल, होम्योपैथिक एवं आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी, खेल मैदान, पंचायत भवन, टेलिफोन एक्सचेंज, पशु हस्पताल, गौ-शाला, गैस एजेंसी, केंद्रीय विद्यालय, लाडवा-पिपली रोड पर गांव में दो पैट्रोल पंप, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कन्या राजकीय माध्यमिक विद्यालय, राजकीय प्राथमिक पाठशाला व दो निजी स्कूल हैं।
भवन में कुछ दिन रहे थे डॉक्टर : डॉ शैलेंद्र
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के एसएमओ डॉ शैलेंद्र खांमरा का कहना है कि ये बिल्डिंग पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के कार्यकाल 2004 में शुरू बननी शुरू हुई थी फिर सरकार बदल गई, जिसका में कांग्रेस सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हूडा ने उद्घाटन कर दिया था। उसके बाद कुछ डॉक्टरों ने यहां रहना शुरू किया, लेकिन वहां गंदगी होने के कारण उन्होंने रहना छोड़ दिया। और उसके बाद इस बिल्डिंग में कोई नही रहा जो आज खंडहर में तब्दील हो गई।
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गांव में बंद है विकास कार्य : यशपाल
ग्राम सचिव यशपाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि गांव में विकास कार्य फिलहाल बंद है। गांव की ओर से कोई डिमांड आती है उसका प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेज देते हैं। अभी कोई बड़ी मांग नहीं आई है।
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