कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हॉकी खिलाड़ी छह वर्षों से एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम का इंतजार कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन घोषणा कई बार कर चुका है पर आश्वासन के अलावा खिलाड़ियों को हासिल कुछ भी नहीं हुआ है। जबकि यदि यहां एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम बन जाए तो भारतीय हॉकी में कुरुक्षेत्र एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर सकता है।
इसी वर्ष विश्वविद्यालय की वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के समापन समारोह में कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने खेल उपलब्धियों पर गर्व महसूस करते हुए यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की हॉकी एस्ट्रोटर्फ नर्सरी सहित वेलोड्रम जैसी सुविधाएं जल्द मुहैया कराने की घोषणा की थी। इसके अलावा खिलाड़ियों ने भी एस्ट्रोटर्फ की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान भी चलाया था।
वैसे यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी कुलपति अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर रूसा की ग्रांट से एस्ट्रोटर्फ नर्सरी तैयार करने की घोषणा कर चुके हैं। यही नहीं, पांच साल पूर्व भी एस्ट्रोटर्फ नर्सरी को मूर्त रूप देने की घोषणा हुई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। हालांकि ऐसा नहीं है कि यहां की खेल प्रतिभाएं एस्ट्रोटर्फ की मोहताज है। बिना इसके ही विश्वविद्यालय के हॉकी खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहें है। ऐसे में उन्हें एस्ट्रोटर्फ की सुविधा मिले तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का परचम लहरा सकते हैं। वहीं, केयू प्रवक्ता ने बताया कि हॉकी मैदान में एस्ट्रोटर्फ नर्सरी तैयार करने को लेकर प्रशासन प्रयासरत है। यदि सरकार द्वारा अनुदान राशि उपलब्ध होगी तो शीघ्र ही एस्ट्रोटर्फ की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी। वहीं खेल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मैदान में एस्ट्रोटर्फ की व्यवस्था कराने के लिए प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी गई है। प्रशासन ने करीब पांच से छह करोड़ रुपये का इस्टीमेट तैयार कर सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा गया है।
घास पर दौड़ने में होती है परेशानी: शैलजा
नेशनल और इंटर यूनिवर्सिटी हॉकी टूर्नामेंट खेल चुकी हॉकी खिलाड़ी कुमारी शैलजा गौतम ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए हॉकी मैदान पर अभ्यास के दौरान खिलाड़ियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, क्योंकि इससे खिलाड़ियों के दौड़ने की वह गति नहीं बन पाती जो गति एस्ट्रोटर्फ के लिए चाहिए। वह पिछले 9 वर्षों से विश्वविद्यालय के मैदान पर हॉकी का अभ्यास कर रही है। हॉकी खिलाड़ी कई बार एस्ट्रोटर्फ की मांग उठा चुके हैं।
बड़ी प्रतियोगिताएं हमेशा एस्ट्रोटर्फ पर होती है : सुनील
हॉकी के गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी सुनील ने बताया कि इंटर यूनिवर्सिटी, नेशनल व इंटरनेशल हॉकी प्रतियोगिता हमेशा एस्ट्रोटर्फ पर ही खेली जाती है, लेकिन विश्वविद्यालय के मैदान में अभ्यास करने वाले खिलाड़ी इन प्रतियोगितों में एस्ट्रोटर्फ पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते, क्योंकि उन्हें एस्ट्रोटर्फ पर खेलने का अभ्यास नहीं होता। इसकी वजह से हॉकी खिलाड़ियों को केवल निराशा हाथ लगती है।
राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का बढ़ेगा गौरव: दीपक
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हॉकी टीम के कप्तान दीपक ने बताया कि हॉकी के खिलाड़ियों को यदि एस्ट्रोटर्फ की सुविधा उपलब्ध कराई जाए तो उन्हें न केवल श्रेष्ठ प्रदर्शन का अवसर मिला, बल्कि राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव भी बढ़ेगा। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को एस्ट्रोटर्फ की सुविधा उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाना चाहिए, ताकि विश्वविद्यालय के खिलाड़ी हर क्षेत्र में अग्रणी हो। यह तभी संभव होगा, जब विश्वविद्यालय इसकी पहल करेगा।
एस्ट्रोटर्फ करेगा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित: सविता राम केवल
तीन बार नेशनल खेल चुकी हॉकी खिलाड़ी सविता राम केवल ने बताया कि एस्ट्रोटर्फ खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए प्रोत्साहित करता है, क्योंकि एस्ट्रोटर्फ पर अभ्यास करने से खिलाड़ियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है, जिसके बल पर वे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के जौहर दिखा सकती हैं। इससे हॉकी खिलाड़ियों में नव ऊर्जा का संचार होता है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द हॉकी प्रेमियों की मांग को पूरा करना चाहिए।
केयू ने दिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी: सैनी
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हॉकी कोच एसके सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालय ने देश को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं, लेकिन गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ की आवश्यता है। एस्ट्रोटर्फ की व्यवस्था से खिलाड़ियों को अपनी योग्यता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा, जिससे वे विश्व में अपनी पहचान बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र की खिलाड़ी निशा यादव, करुणा, पूजा, देविका प्रेम बहादुर, नेहा शर्मा, सविता सहित दर्जनों खिलाड़ी अपनी योग्यता के बल पर पदक हासिल कर चुके है। अब विश्वविद्यालय में करीब 90 खिलाड़ी हॉकी का अभ्यास कर रहे हैं, जिन्हें एस्ट्रोटर्फ की सुविधा मिले तो वे शिखर पर पहुंच सकते हैं।