सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग हरियाणा के निदेशक समीर पाल सरो ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से हिंदी आंदोलन के सत्याग्रहियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देने का निर्णय लिया जाना हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने हिंदी आंदोलन के दौरान जेल यातनाएं सहने वाले लोगों का डाटा एकत्रित किया जा रहा हैं।
इस डाटा को एकत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों को 10 दिन का समय दिया हैं। निदेशक समीर पाल ने वीरवार को देर सायं वीडियो कांफ्रेंसिंग से बताया कि हिंदी आंदोलन 1957 के दौरान प्रताड़ित किए गए एवं जेल यातनाएं सहने वाले नागरिकों द्वारा किए गए संघर्ष का सम्मान राज्य सरकार की तरफ से किया जाएगा।
इन लोगों को सम्मान देने के लिए सरकार ने हिंदी आंदोलन के सत्याग्रहियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देने का निर्णय लिया जाना हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को अब तक प्रदेश के विभिन्न जिलों से करीब 340 आवेदन प्राप्त हुए है। इनमें से सबसे ज्यादा आवेदन रोहतक जिले से है। इन आवेदनों के सत्यापन के लिए उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया है और संबंधित जिले के नगराधीश को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों को अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए है। सरकार का प्रयास है कि कोई भी हिंदी आंदोलनकारी इस योजना से छूटने न पाए।
सूचना, जन संपर्क एवं भाषा विभाग हरियाणा की ई-मेल डीजीआईपीआरहरियाणा(एट)याहू(डाट)कॉम पर भी जानकारी भेजी जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने हिंदी आंदोलन के दौरान संघर्ष करने वाले लोगों को स्वतंत्रता सेनानियों का दर्जा देने के निर्णय लिए जाने को ऐतिहासिक बताया हैं। इस मौके पर डीआरओ अशोक मलिक, डीआईपीआरओ सुनील कुमार, फास्टवे केबल के जीएम सुनील राय, केबल संचालक सुरेश सिंगला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।