कुरुक्षेत्र। बढ़ती गर्मी और लू (हीट-वेव) को देखते हुए सरकारी अस्पतालों में सरकार ने मरीजों के लिए हीट स्ट्रोक कक्ष बनाने के निर्देश जारी किए थे, मगर एलएनजेपी अस्पताल में अभी तक ऐसा कोई कक्ष नहीं बनाया गया है। हालांकि अस्पताल प्रबंधक का दावा है कि हीट-वेव से पीड़ित मरीज के उपचार के लिए अस्पताल पूरी तरह से तैयार हैं। इसके लिए अस्पताल में 10 बेड आरक्षित कर दिए गए हैं, जबकि अभी से गर्मी का प्रकोप देखने को मिलने लगा है।
दोपहर के समय चलने वाली गर्म हवाओं के थपेड़ों से जनजीवन प्रभावित होने लगा है। दिन का अधिकतम तापमान 42 डिग्री बढ़ने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जहां उल्टी, दस्त, बुखार, खुजली व डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है, वहीं गर्मी के कारण चक्कर आना, घबराहट, कमजोरी और धड़कन भी तेज होने लगी है। एलएनजेपी मेें सामान्य ओपीडी 30 फीसदी तक बढ़ चुकी है। गर्मी से बचने के लिए लोग ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करने लगे हैं।
एलएनजेपी में सामान्य दिनों में 750 के करीब ओपीडी होती थी, मगर गर्मी बढ़ने और गर्म हवाएं चलने से 200 से ज्यादा ओपीडी बढ़ चुकी है। अस्पताल में उल्टी, दस्त, बुखार, सिर दर्द और डायरिया के मरीज पहुंच रहे हैं। इसके अलावा अवसाद के मरीज भी सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में मरीजों की संख्या में इजाफा हो सकता है, क्योंकि मौसम विभाग हीट वेव और गर्मी बढ़ने के संकेत पहले ही दे चुका है।
बाक्स
हीट-वेव के मरीजों के लिए नहीं कोई कक्ष
हीट-वेव के पीड़ित मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल में कोई अलग से कोई कक्ष नहीं बनाया गया है, जबकि भारत सरकार इसके लिए निर्देश जारी कर चुकी है ताकि हीट वेव के ग्रस्त लोगों को अच्छा उपचार मिल सके। लोकसभा चुनाव को लेकर यह निर्देश दिए गए थे।
बाक्स
बचाव के लिए सावधानियां जरूरी : डॉ. शैलेंद्र, फोटो 33
एलएनजेपी अस्पताल के परामर्शक-फिजिशियन डॉ.शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि दोपहर 12 और तीन बजे तक धूप में बाहर जाने से बचें। अगर किसी कारणवश जाना पड़े तो पानी की बोतल अपने साथ जरूर रखें। ज्यादा मात्रा में थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। शरीर को डिहाइड्रेट करने वाले भोज्य पदार्थों का सेवन न करें। बुखार, सिर दर्द, उल्टी व दस्त होने पर तुरंत उपचार कराएं।
बाक्स
10 बेड किए गए निर्धारित : डॉ. अनुपमा
अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुपमा सिंह ने बताया कि लू के मरीजों के लिए अलग-अलग से 10 बेड निर्धारित कर दिए गए हैं। अभी ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। इससे निपटने के लिए अस्पताल पूरी तरह से तैयार और सक्षम है।