कुरुक्षेत्र। डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली।
कुरुक्षेत्र। अक्सर अधेड़ उम्र में होने वाली हाइपरटेंशन उच्च रक्तचाप की बीमारी टीनएजर्स युवाओं को शिकार बना रही है। दुनियाभर में एक अरब से ज्यादा लोग हाइपरटेंशन की चपेट में है। यह दुनियाभर में हृदय रोग और समय से पहले मौत का प्रमुख कारण है। हैरानी तो इस बात की है कि अधिकतर लोगों को पता ही नहीं होता कि उनको यह बीमारी है। इसलिए इस बीमारी को साइलेंट किलर भी कहा जाता है।
एलएनजेपी अस्पताल में इस बीमारी से ग्रस्त प्रतिदिन 50 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं। महीने भर में यहां करीब डेढ़ हजार मामले आते हैं। इनमें प्रतिदिन चार से पांच गर्भवती, हर तरह की सर्जरी करवाने वाले, दांत को निकलवाने वाले और शुगर मरीज शामिल है। इनमें कई लोग तो खुद के हाइपरटेंशन से अनजान होते हैं। जांच के बाद उनको इसका पता चलता तो उनको हैरानी होती है, क्योंकि वे खुद को समझते हैं। इसलिए समय-समय पर इसकी जांच जरूर करानी चाहिए। इसके अलावा कई लोग वाइट कोट हाइपरटेंशन या सिंड्रोम से भी ग्रस्त होते हैं। इस अवस्था में लोगों को चिकित्सकों के पास जाने से डर लगता है। इस तरह के लोगों का वाइट कोट पहने चिकित्सक के पास होने पर उनका रक्तचाप बढ़ने लगता है। हालांकि घर पर उनका रक्तचाप सामान्य रहता है। इसलिए विशेषज्ञ इसे वाइट कोट हाइपरटेंशन कहते हैं।
भम्र में न रहे हाइपरटेंशन वाले : डॉ. शैली
एलएनजेपी अस्पताल के फिजीशियन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि इसे उत्तर भारत में एक भम्र और आम धारणा यह भी कि अधिकतर लोग यह बीमारी के होने पर सफेद नमक खाना छोड़ देते हैं। उसकी जगह वह लोग सेंधा नमक और काले नमक का सेवन ज्यादा मात्रा में शुरू कर देते हैं। उनको लगता है कि सैंदा और काला नमक खाने से उनका परहेज हो जाएगा, मगर उसका प्रभाव शरीर पर सफेद नमक के समान ही पड़ता है। इसलिए ज्यादा नमक खाने से बचना चाहिए।
वैश्विक तौर पर 25 फीसदी कम करने का लक्ष्य
अस्पताल के दूसरे फिजीशियन डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व उच्च रक्तचाप दिवस मनाने का मकसद दुनिया भर में दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचने के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना है। इसके अलावा 2025 तक हाइपरटेंशन के प्रसार को 25 फीसदी तक कम करने के वैश्विक लक्ष्य प्राप्त करना है।