कुरुक्षेत्र। भक्त प्रलाद की कथा करती हुई कथा वाचिका सुमन जाजू माहेश्वरी । स्वयं
कुरुक्षेत्र। जयराम आश्रम के मुख्य मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भक्त प्रह्लाद चरित्र और वामन अवतार का वर्णन किया गया। कथावाचिका सुमन जाजू माहेश्वरी ने प्रह्लाद चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी जो भगवान का नाम नहीं छोड़ता, वही सच्चा भक्त होता है।
उन्होंने कहा कि प्रह्लाद ने अपने पिता हिरण्यकश्यप के अत्याचारों के बावजूद भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा और अंततः सत्य की विजय हुई। उन्होंने कहा कि भक्ति वह शक्ति है जो हर भय को समाप्त कर देती है और जीवन में आने वाली कठिनाइयों से उबरने का साहस देती है।
इसके बाद वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भगवान ने छोटे ब्राह्मण बालक का रूप धारण कर राजा बलि के अहंकार का अंत किया और धर्म की स्थापना की। उन्होंने कहा कि अहंकार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह भगवान के सामने टिक नहीं सकता। कथावाचिका ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे प्रकृति में बसंत आने पर सूखे वृक्ष भी हरे-भरे हो जाते हैं, उसी प्रकार भगवान का नाम जीवन में नई ऊर्जा और आनंद का संचार करता है।
कुरुक्षेत्र। भक्त प्रलाद की कथा करती हुई कथा वाचिका सुमन जाजू माहेश्वरी । स्वयं