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कन्नौज-कुरुक्षेत्र के 1400 साल पुराने रिश्तों मे नई महक पैदा करेगा एफएफडीसी

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केंद्र सरकार के अधीनस्थ कन्नौज स्थित इकलौते सुगंध सुरस केंद्र (एफएफडीसी) अब कुरुक्षेत्र में हरियाणा के विभिन्न जिलों के दिव्यांगों को इत्र, खुशबूदार फूलों के अर्क और अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण देगा। एफएफडीसी की यह पहल कन्नौज और कुरुक्षेत्र के 1400 साल पुराने रिश्ते को मजबूत भी करेगी। बताया जाता है कि इतिहास में राजा हर्षवर्धन के कार्यकाल में वर्धनवंश की राजधानी थानेसर (कुरुक्षेत्र) थी, जो बाद में कन्नौज हुई। यही रिश्ता अब एक बार फिर इस प्रशिक्षण शिविर के रूप में प्रगाढ़ होगा।
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उल्लेखनीय है कि कन्नौज के उक्त राष्ट्रीय संस्थान के अधीन इंफाल, ओडिशा और यूपी के कानपुर में तीन रीजनल सेंटर भी संचालित हैं, जोकि सुगंध और सुरस के क्षेत्र में भारत आगे लाने के लिए निरंतर कार्यक्रम चला रहे हैं। इसी दिशा में कन्नौज संस्थान द्वारा कुरुक्षेत्र में 10 दिवसीय प्रशिक्षण चल रहा है।
इस प्रशिक्षण के लिए आए फ्रेग्रेंस एंड फ्लेवर डेवलपमेंट सेंटर कन्नौज के निदेशक डॉ. एपी सिंह ने बताया कि कुरुक्षेत्र में पंचकूला, यमुनानगर, करनाल जिलों के दिव्यांग छात्र-छात्राओं को आत्मनिर्भर कैसे बनाएं और इनकी क्षमता के लिहाज से उन्हें स्वावलंबी बनाने के लिये प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के जरिए दिव्यांग छात्रों को गुलाब जल, अगरबत्ती, हवन सामग्री, गुलकंद, गुलाल, फेस पैक और परफ्यूम इत्यादि तैयार करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। यह 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कैंप में सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र कन्नौज के विशेषज्ञ विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि भारत में खुशबू का कारोबार 9 हजार करोड़ सालाना का है। पहले भारत में विदेशों से भी करीब एक हजार करोड़ रुपये की अगरबत्ती मंगवाई जाती थी। इनमें अकेले वियतनाम से ही 800 करोड़ की अगरबत्ती की खरीद होती रही है। निदेशक डा.सिंह के मुताबिक दुनिया में खुशबू की रैंकिंग में अमेरिका और फ्रांस के बाद तीसरे पायदान पर है।
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2019 में केंद्र ने लगाई थी विदेशी अगरबत्ती पर रोक
संस्थान के प्रधान निदेशक डा. एसवी शुक्ला ने बताया कि भारत सरकार ने 31 अगस्त 2019 को विदेशों से आयात होने वाली अगरबत्ती पर रोक लगा दी थी। ताकि भारत में खड़े हो रहे अगरबत्ती के बड़े कारोबार पर विदेशी माल का असर ना हो। इस रोक के बाद अब भारत में तैयार हो रही अगरबत्ती के कारोबार में और इजाफा हुआ है।
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कई देशों को प्रशिक्षण दे चुका है एफएफडीसी
भारत सरकार का फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर डेवलपमेंट सेंटर कन्नौज कई देशों को भी प्रशिक्षण दे चुका है। अब तक इस संस्थान द्वारा रवांडा, इजिप्ट, श्रीलंका और भूटान सहित ऐसे कई देश हैं। जिनके प्रतिनिधियों को अब तक प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं संस्थान के निदेशक अनुसार 1995 में कन्नौज में स्थापित किया गया यह संस्थान एक वर्षीय कोर्स भी करा रहा है।
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कोरोनाकाल में इस कारोबार पर नहीं पड़ा असर
एफएफडीसी के प्रधान निदेशक डा. शुक्ला के मुताबिक उनके संस्थान से प्रशिक्षित 250 से ज्यादा अगरबत्ती कारोबार खड़े हुए हैं, जोकि सफल कारोबारी के रूप में पहचान बना चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत में अगरबत्ती का सालाना कारोबार 9 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का है। कोरोनाकाल में भी इस कारोबार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।
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