कुरुक्षेत्र। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी व अन्य किसान नेता नौ दिन बाद वीरवार को जेल से रिहा हो गए, जिनका बाहर आते ही समर्थकों व अन्य किसानों ने ढोल बजाकर स्वागत किया। उन्हें काफिले के साथ पहले पिपली स्थित देवीलाल पार्क और फिर शाहाबाद ले जाया गया। जहां किसान रेस्ट हाउस में भी उनका स्वागत किया गया।
जेल से छूटते ही चढूनी ने कहा कि वे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मांग करते हैं कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल की जगह गृह मंत्री अनिल विज या किसी अन्य को प्रदेश के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपे। मुख्यमंत्री के चलते ही इतना बड़ा विवाद हुआ। सूरजमुखी की खरीद एमएसपी पर किया जाना इतनी बड़ी बात नहीं थी, लेकिन एक अधिकारी के बहकावे में आकर उन्होंने स्थिति यहां तक पहुंचा दी और बाद में सरकार को मुंह की खानी पड़ी।
चढूनी ने कहा कि शाहाबाद में लाठीचार्ज के दौरान ऐसा कोई वाकया नहीं हुआ था कि उन पर धारा 307 के तहत मामला दर्ज कर लिया जाए। यह पूरी तरह से गलत किया गया और अब यह धारा हटानी पड़ी तो उन्हें रिहा भी किया गया। हालांकि सरकार ने एमएसपी के बराबर सूरजमुखी का भाव देने की मांग मानी है, लेकिन सीधे एमएसपी न देना सरकार की नाकाबिलियत को दर्शाता है।
किसानों के हित के लिए लड़ाई रखेंगे जारी चढूनी ने कहा कि वे किसानों के हित के लिए लड़ाई जारी रखेंगे और किसी भी स्तर पर किसानों को कमजोर नहीं होने देंगे। अब किसानों के अन्य मामलों को लेकर संघर्ष किया जाएगा।
ये नेता थे जेल में बंद
भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी वासी चढूनी जाटान, प्रदेश प्रवक्ता राकेश बैंस वासी माजरी मोहल्ला शाहाबाद, जसबीर सिंह मामूमाजरा, प्रिंस वड़ैच लोहार माजरा, जरनैल सिंह वासी रायमाजरा, जयराम वासी हमीदपुर, गुलाब सिंह वासी साहा जिला अंबाला, पंकज वासी हबाना व सुरजीत सिंह वासी कसेरला खुर्द जिला अंबाला।
ये लगी थी धाराएं, 307 हटी तो मिली जमानत
शाहाबाद में छह जून को नेशनल हाईवे जाम करने के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। उसी दौरान पुलिस ने उक्त किसानों को गिरफ्तार कर लिया था। इन नामजद किसानों के साथ-साथ 700 से ज्यादा किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसमें नेशनल हाईवे एक्ट आठ बी, सेक्शन तीन पीपीए, 120 बी, 147, 149, 186, 188, 283,332, 353 व 307 के तहत कार्रवाई की गई थी। किसानों की ओर से पिपली में नेशनल हाईवे जाम करने के दौरान हुए समझौते के तहत धारा 307 हटाई गई, जिसके बाद उक्त नामजद किसानों के खिलाफ दर्ज मामले में धारा 307 हटाई गई, जिसके बाद अदालत ने वीरवार को उनकी जमानत मंजूर कर ली। शाम छह बजे उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।