पिहोवा। केंद्र सरकार राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती (एनएमएनएफ) नामक एक मिशन को चला रही है, जिसके तहत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती से किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करने और पर्यावरण को बचाने में मदद मिल सकती है। ये शब्द बुधवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक कर्मचंद ने पिहोवा में आयोजित किसान वर्कशॉप में बतौर मुख्य अतिथि किसानों को संबोधित करते हुए कहे।
बुधवार को निजी पैलेस में आयोजित किसान मेले में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक कर्मचंद ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की तथा किसानों को संबोधित किया। इस मौके पर उपमंडल कृषि अधिकारी डाॅ. मनीष वत्स ने उपनिदेशक का स्वागत किया।
उपनिदेशक ने कहा कि प्राकृतिक खेती एक ऐसी खेती पद्धति है जो मिट्टी और पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए फसलों का उत्पादन करती है। यह रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से दूर रहती है। प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाकर किसान मिट्टी और मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी खेती कर सकते हैं। इस वर्कशॉप के आयोजन का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी देना और उन्हें इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।