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आदि बद्री में जलाशय परियोजना के लिए सरकार ने किया 800 करोड़ का प्रावधान:सीएम

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Government made a provision of 800 crores for the reservoir project at Adi Badri: CM - फोटो : Kurukshetra
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कुरुक्षेत्र। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि विश्व की सबसे पवित्र एवं ज्ञान की देवी सरस्वती नदी का उदगम स्थल हरियाणा प्रदेश में आदि बद्री यमुनानगर में है। इस स्थल पर सरकार की तरफ से डैम, बैराज और सरस्वती सरोवर का निर्माण करने की परियोजना के लिए 800 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। इस परियोजना के तहत बाढ़ के पानी से प्रभावित तकरीबन 894 हेक्टेयर भूमि पर बरसात के समय आने वाले पानी का प्रबंध किया जाएगा। इतना ही नहीं पवित्र नदी सरस्वती को मारकंडा नदी के साथ जोड़ने का काम भी शुरू कर दिया गया है।
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सीएम सोमवार को चंडीगढ़ से वर्चुअल रूप अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव को लेकर हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड एवं विद्या भारती संस्कृति शिक्षण संस्थान के तत्वावधान में सरस्वती नदी नई संभावना और इसकी विरासत विषय पर आयोजित एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में बतौर मुख्यातिथि के रूप में बोल रहे थे। सेमिनार में मुख्य वक्ताओं के साथ-साथ अमेरिका, यूरोप सहित 7 देशों के वैज्ञानिक और 1 लाख लोग वर्चुअल रूप से जुड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पदम विभूषण स्व. डॉ. दर्शन लाल जैन के प्रयासों से ही सरस्वती नदी को फिर से धरातल पर प्रवाहित करने की योजना को तैयार किया गया। जब सरकार की यह योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा तभी स्वर्गीय डा. दर्शन लाल जैन को सही मायनों में श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह साबित हो चुका है कि हरियाणा की गोद से ही पवित्र नदी सरस्वती का प्रवाह रहा है और वैदिक काल में इसका उद्गम स्थल आदिबद्री रहा है। यह नदी आदिबद्री से लेकर कुरुक्षेत्र, कैथल, सिरसा से होती हुई गुजरात के कच्छ तक पहुंचती है। यदि हड़प्पा सभ्यता की 2600 बस्तियों को देखें तो पाते हैं कि वर्तमान पाकिस्तान में सिंधु तट पर मात्र 265 बस्तियां थीं, जबकि शेष अधिकांश बस्तियां सरस्वती नदी के तट पर मिलती हैं। उन्होंने कहा कि इसरो सहित 70 से ज्यादा शोध केंद्र सरस्वती नदी को फिर से धरातल पर प्रवाहित करने के लिए काम कर रहे है। इसरो से मिली परिसीमन और मानचित्रों के आधार पर सरकार ने आदिबद्री में डैम, बैराज के लिए एक परियोजना तैयार की है। इस नदी के साथ लगने वाले 23 चैनलों का नाम भी सरस्वती के नाम से जाना जाता है। हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच ने भी अपने विचार रखे।
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इन्होंने भी रखे विचार
हरियाणा के खेल एवं युवा मामले मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि देश की सबसे बड़ी और पवित्र सरस्वती नदी का पिहोवा से प्रवाहित होना एक अनोखा सौभाग्य है। त्रिनिदाद और टोबैगो के उच्चायुक्त डॉ. रोजर गोपाल ने कहा कि नई पीढ़ी के लिए बहुत बड़ा गिफ्ट होगा सरस्वती नदी का फिर से प्रवाहित होना। देश के आर्थिक सलाहकार एवं लेखक संजीव सान्याल ने कहा कि ऋग्वेद में 72 बार पानी की मां सरस्वती नदी का है उल्लेख है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि मोक्षदायिनी नदी है पवित्र नदी सरस्वती।
तकनीकी सत्र में सरस्वती पर की लंबी चर्चा
तकनीकी सत्र में बेलारशियन स्टेट यूनिवर्सिटी से डॉ. एलेह पेरजावेकिश, एएसआई के संयुक्त महानिदेशक डॉ. संजय मंजुल, जरनल डॉ. जीडी बख्शी, डॉ. जेएन रवि, इसरो से डॉ. बीके भद्रा, यूएसए से डॉ. निलेश नीलकांथोक, गोआ से लीना महेंडले, चेन्नई सरस्वती शोध केंद्र के निदेशक डॉ. एस कल्याणरमन, वेव्स सोसाईटी से प्रोफेसर शशिबाला, डॉ. मनोगना व सीजीडब्लयूबी के आरडी डॉ. अनूप नागर ने वैज्ञानिक दृष्टि से पवित्र नदी सरस्वती पर लंबी चर्चा की है।
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