अपनी 23 मांगों को लेकर रविवार को सरकारी विभागों के कर्मचारी कुरुक्षेत्र में प्रदेश सरकार के खिलाफ गरजे। हरियाणा कर्मचारी महासंघ के बैनर तले सड़कों पर उतरे सैकड़ों कर्मचारियों ने नारेबाजी की। इसके बाद सभी ने सांसद और विधायकों को ज्ञापन सौंपे।
महासंघ के जिला अध्यक्ष श्रीचंद सैनी की अध्यक्षता में सुबह ही कुरुक्षेत्र नए बस अड्डे के समीप ताज पार्क में लगभग सभी विभागों के सैकड़ों कर्मचारी एकत्रित होने लगे थे। यहां बैठक कर रोष व्यक्त किया गया। इसका संचालन जिला सचिव अमरीक सिंह चट्ठा ने किया। बैठक के बाद कर्मचारी विधायक सुभाष सुधा के निवास पर पहुंचे। यहां पर भी उन्होंने नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने कुछ देर इंतजार करने के बाद अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन उनके प्रतिनिधि को सौंप दिया। इसके बाद सभी कर्मचारी लाडवा विधायक डॉ. पवन सैनी के निवास पर पहुंचे। यहां भी उन्हें विधायक नहीं मिले। इसके बाद उन्होंने उनके पीए को ज्ञापन सौंप दिया।
यहां से सभी बाद प्रदर्शनकारी कर्मचारी सांसद राजकुमार सैनी के निवास पर पहुंचे और उन्हें अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। इस दौरान श्री चंद सैनी, राजपाल गुंसर आदि ने कहा कि यह महासंघ द्वारा घोषित तीसरे चरण का आंदोलन है। इस दौरान सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए ज्ञापन सौंपे गए हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारी विरोधी नीति अपनाए हुए है।
इससे कर्मचारियों में सरकार के प्रति गहरा रोष बना हुआ है। महासंघ कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों को लेकर सरकार को अवगत करवा चुका है। इसके बाद भी सरकार कर्मचारियों के हितों के प्रति गंभीर नहीं है। इसलिए कर्मचारी सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हुए हैं। अभी भी मांग नहीं मांगी गई, तो चौथे चरण का आंदोलन शुरू किया गया। उसमें बजट सत्र के दौरान विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
इस अवसर पर बिजली बोर्ड वर्कर यूनियन यूनिट के प्रधान कृष्ण पाल चौहान, सर्कल सचिव कृष्ण पाल, आबकारी एवं काराधान विभाग के प्रांतीय उपप्रधान शेर सिंह और रणधीर सिंह, हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन के प्रांतीय उपप्रधान प्रेम सिंह बेरथली और प्रेम सिंह चोरकारसा, डिपो प्रधान तेजवीर पंजेटा, अध्यापक संघ जिला प्रधान रजनीश कंबोज, राजकुमार सैनी आदि ने कर्मचारियों को संबोधित किया।
ये रखीं मांगें
- सभी कच्चे कर्मचारियों को बिना शर्त पक्का किया जाए
- पंजाब के समान वेतन दिया जाए, छठे वेतन आयोग के विसंगतियां दूर की जाएं
- 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें जनवरी 2016 से ही लागू की जाएं
- कर्मचारियों को कैशलेस मेडिकल सुविधा प्रदान की जाए
- नई परिवहन नीति रद्द की जाए, परिवहन बेड़े में 10 हजार बसें शामिल की जाएं
- बिजली निगम बनाने बाद हुए करोड़ों के घाटे की जांच की जाए, कर्मचारियों पर दर्ज केस वापस लिए जाएं
- दो वर्ष की सेवा कर चुके कर्मचारियों की सेवा नियमित की जाए
- ग्रुप डी कर्मचारियों को प्रथम एसीपी 2400, द्वितीय 3200 और तृतीय 3600 दी जाए
- अध्यापकों के एसीपी संबधित मामले जिला स्तर पर निपटाए जाएं
- महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों को पद अनुसार उन्हें तकनीकी कर्मचारी घोषित किया जाए
- पशुपालन विभाग के कर्मचारियों को रिस्क अलाउंस दिया जाए
- आबकारी एवं काराधान विभाग में मुख्यालय से समय पर पदोन्नति की जाए
- शिक्षा बोर्ड कर्मचारियों को 2009 में जो ग्रेड सिविल सचिवालय कर्मियों को दिए उसी तर्ज पर दिए जाए
- भर्ती पर रोक हटाई जाए और रिक्त पदों पर जल्द भर्ती की जाए
- आंगनबाड़ी कर्मचारी और सहायिकाओं को कर्मचारी का दर्जा दिया जाए
- आशा वर्कर और मिड डे मील कर्मियों का मानदेय बढ़ाया जाए
- तकनीकी स्केल वापस लिए जाने के अधिनियम को हटाया जाए
- ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों को सरकार द्वारा सीधे वेतनमान दिया जाए
- निजीकरण और ठेका प्रथा पर प्रतिबंध लगाया जाए
- हड़ताल, धरने और प्रदर्शन पर लगाई गई रोक तत्काल हटाई जाए