कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी के किसानों द्वारा पैदा किया गया गेहूं बिहार से लेकर आसाम व प्रदेश के दूसरे राज्यों के लोगों की भी भूख को शांत करेगा। यहां से खरीदे जा रहे गेहूं से इन प्रदेशों के गोदाम भरे जा रहे हैं। फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया की ओर से ट्रेनों के जरिए गेहूं की विशेष खेप विभिन्न राज्यों में पहुंचाई जा रही है। उठान शुरू होने से लेकर अब तक छह लाख 21 हजार 480 क्विंटल गेहूं पहुंचाया जा चुका है जबकि एजेंसियों के व किराए पर लिए गोदामों में भी अभी तक छह लाख सात हजार 560 क्विंटल गेहूं रखा जा चुका है।
एफसीआई के अधिकारी पहले गेहूं दूसरे राज्यों को भेजने के लिए प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसके चलते उठान धीमा माना जा रहा है, लेकिन अब अधिकारी मंडियों में जाम के हालात देख स्थानीय गोदामों को भी साथ ही भरने पर विचार करने को मजबूर हो गए हैं। सोमवार को अंबाला मंडल की आयुक्त रेणू फुलिया थानेसर व पिपली अनाजमंडियों में पहुंची थी तो वहां आढ़तियों ने स्थानीय गोदामों में भी अनाज पहुंचाने की मांग रखी थी। इस पर मंडल आयुक्त ने स्थानीय अधिकारियों को स्पेशल के साथ-साथ स्थानीय स्तर के गोदामों में भी गेहूं पहुंचाने को लेकर प्रबंध किए जाने के आदेश भी दिए थे।
अभी तक 32 फीसदी गेहूं का होना है उठान
बता दें कि खरीद एजेंसियों ने जिला भर की मंडियों से अब तक 38 लाख 23 हजार 830 क्विंटल गेहूं खरीदा है, जिसमें से 19 लाख 91 हजार 460 क्विंटल गेहूं खाद्य आपूर्ति विभाग, 16 लाख 09 हजार 730 क्विंटल गेहूं हैफेड व एक लाख 73 हजार 760 क्विंटल गेहूं वेयर हाउस कार्पोरेशन द्वारा खरीदा गया है। खरीद किए गेहूं में से अभी भी 32 फीसदी गेहूं मंडियों में ही उठान की बाट जोह रहा है।
तेज उठान को लेकर मिलता रहा महज भरोसा
आढ़तियों से लेकर किसानों तक गेहूं उठान धीमा होने के चलते जमकर रोष जताया जा चुका है। मामला अधिकारियों के संज्ञान में भी दिया जा चुका तो मंडियों की हालत अधिकारी खुद भी देख चुके हैं। इसके बावजूद किसान व आढ़तियों को उठान तेज करवाए जाने का महज भरोसा ही मिलता रहा है। अब गेहूं की आवक ही सीजन अनुसार कम होने पर समस्या का समाधान होने की उम्मीद की जाने लगी है।
अब मौसम ने बढ़ाई चिंता, छह रुपये तक नजराना
मंगलवार से ही अगले तीन से चार दिन तक मौसम में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में किसानों से लेकर आढ़तियों में भी चिंता व बेचैनी बनी हुई है। इसी का फायदा सरकार के आदेशों को दरकिनार कर उठान में लगे ठेकेदार उठा रहे हैं। आढ़तियों की माने तो थानेसर मंडी में भी पांच से छह रुपये तक कथित तौर पर नजराना लिया जाने लगा है। यहां तक कि ठेकेदार अब एजेंसियों के अधिकारियों की भी परवाह नहीं कर रहे हैं। आढ़ती मेहर सिंह का कहना है कि पहले एजेंसियों के अधिकारी गेट पास के साथ ही संबंधित फर्म पर ट्रक लोड होने के लिए भेजते थे, लेकिन अब आढ़तियों की ही आपाधापी का फायदा उठाने के लिए इन आदेशों की कोई परवाह नहीं है। जहां नजराना ज्यादा होता है वहीं से उठान कर लिया जाता है। हर सीजन में ही यह चलता है, लेकिन कोई मानने व रोक लगाने को तैयार नहीं है।
नजराने की नहीं मिली कोई शिकायत : डीएफएससी
डीएफएससी सुरेंद्र सिंह सैनी का का कहना है कि नजराने को लेकर उनके पास कोई शिकायत नहीं पहुंची है। उठान में कोई भेदभाव भी नहीं होने दिया जा रहा है। किसी आढ़ती को परेशानी है तो शिकायत दे सकता है। जांच कर कार्रवाई जरूर की जाएगी।