ग्लोबल वार्मिंग के चलते बिगड़े वातावरण का असर अब कृषि पर भी पडने लगा है। यह ग्लोबल वार्मिंग का ही परिणाम माना जा रहा है कि इस बार गेहूं बिजाई सीजन पूर्व की वर्षो की बजाए 15 से 20 दिन तक लेट शुरु हो रहा है। हालांकि इसका कुछ असर धान की फसल पर भी पड़ा, जिसके चलते यह फसल लेट पककर तैयार हुई और अब गेहूं बिजाई भी इससे अछूत नहीं रही है। गेंहू बिजाई लेट होने से जहां किसानों को पिछेती किस्म के बीजों को प्राथमिकता देनी पड़ रही है वहीं कृषि वैज्ञानिक भी किसानों को पिछेती किस्म के बीजों से ही सीजन शुरु होते ही गेहूं बिजाई का आह्वान करने लगे है। बता दें कि पहले अक्तूबर माह के मध्य से ही गेहूं बिजाई शुरु हो जाती थी जबकि उससे पहले धान की फसल पकने उपरांत कट जाती थी। लेकिन इस बार जहां धान की फसल लेट पककर तैयार हुई वही गेहूं बिजाई भी इस बार लेट शुरु हो पाई है। किसानों से लेकर कृषि वैज्ञानिक भी गेहूं बिजाई के लिए अक्तूबर माह में उचित मौसम नहीं मान रहे थे, जिसके चलते अधिकतर किसान इस माह में गेहूं बिजाई से परहेज करते दिखाई दिए। यह ग्लोबल वार्मिंग व मौसम अनुकूल न होने का ही परिणाम है कि अभी तक महज जिला भर के 1 लाख 20 हेक्टेयर क्षेत्र में से 25 हजार हेक्टेयर में ही गेहूं की बिजाई हो पाई है। पिछले लगभग चार दिनों मौसम में शुरु हुई ठंडक व गेहूं बिजाई के अनुकूल हुए मौसम के चलते गेहूं बिजाई जोर पकडने लगी है। हालांकि कृषि वैज्ञानिक पिछेती किस्म के गेहूं की बिजाई 25 दिसम्बर तक उचित मान रहे है, लेकिन अभी से ही किसानों को इस किस्म के बीजों की ही बिजाई करने की सलाह दी जाने लगी है।
ये है गेहूं की मुख्य किस्में
कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो गेहूं की डब्ल्यूएच 1121, डब्ल्यूएच 1021, डीपीडब्ल्यू 90, राज 3765 व एचडी 3059 किस्में ही मुख्य है। इसके साथ ही इस बार किसान 2968 किस्म के गेहूं की बिजाई को भी प्राथमिकता दे रहे है। इस किस्म के गेहूं के बीज के लिए प्रदेश के कई हिस्सों में किसानों को पसीना बहाना पड़ रहा है।
क्या कहते है किसान
गांव पलवल निवासी किसान महेंद्र ङ्क्षसह, मनोज कुमार का कहना है कि इस बार गेहूं बिजाई 25 अक्तूबर के बाद शुरु हुई है जबकि पहले अक्तूबर माह में अधिकतर बिजाई कर दी जाती थी। इस बार उस समय ठंड व गेहूं बिजाई के अनुसार मौसम न होने के चलते किसानों ने गेहूं बिजाई में रुची नहीं दिखाई।
प्रमाणित बीज ही प्रयोग करें किसान : डॉ कर्मचंद
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ कर्मचंद का कहना है कि इस बार मौसम गेहूं बिजाई के अनुसार नवंबर माह के पहले सप्ताह के मध्य के बाद हुआ है। पिछले चार दिनों से ही ठंड बढ़ी है और गेहूं की बिजाई ऐसे मौसम में ही उचित रहती है। उन्होंने आंशका जताई कि लेट बिजाई होने पर उत्पादन पर कुछ असर पड़ सकता है। उन्होंने किसानों को प्रमाणित बीजों की ही बिजाई करने की सलाह दी है।