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Kurukshetra News: सरकार के नशा मुक्ति अभियान को दे रहे गति, जिले के दो औषधि नियंत्रण अधिकारी होंगे सम्मानित

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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राज्य सरकार की ओर से जिले के दो औषधि नियंत्रण अधिकारियों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें वरिष्ठ औषधि नियंत्रण अधिकारी सारीका मलिक व औषधि नियंत्रण अधिकारी गुलशन कुमार शामिल है। इससे औषधि नियंत्रण विभाग में खुशी की लहर दौड़ गई है।
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इन्होंने एमटीपी किट का भंडाफोड़ करने में व नशीली दवाइयां पकड़कर नशा मुक्त भारत बनाने के अभियान में अपनी अहम भूमिका निभाई है। बता दें कि सारीका मलिक की टीम ने हाल ही में प्रदेश में अवैध रूप से एमटीपी किट बेचने वाले एक गिरोह को पकड़ा था, जिसके खिलाफ प्रदेश के कई जिलों में कई एफआरआई दर्ज थी। वहीं इन दोनों अधिकारियों ने जिले में मेडिकल स्टोरों व झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ एक अभियान चलाकर बड़े स्तर पर कार्रवाई की। जिसे लेकर इन दोनों अधिकारियों को सम्मानित किया गया है।

पंचकूला में हुक्का बार को बंद करवा चुकी सारीका मलिक
सारीका मलिक करीब 20 साल से इस विभाग में अपनी सेवाएं दे रही हैं और तीन साल से वरिष्ठ औषधि नियंत्रक अधिकारी के पद पर कुरुक्षेत्र जोन में कार्यरत हैं। उन्हें प्रदेश के औषधि नियंत्रण विभाग में पहली महिला अधिकारी होने का गौरव प्राप्त है। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश में नशे के खिलाफ एक विशेष अभियान चला रही हैं, ताकि मेडिकल पर बिकने वाले नशे की दवाइयों पर काबू पाया जा सके। उनकी टीम जोन में हर रोज दबिश देकर प्रतिबंधित दवाओं को पकड़ रही है।
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इससे पहले, उन्होंने पंचकूला में अपनी नियुक्ति के दौरान हुक्का बारों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें बंद करवाया था। मलिक बताती हैं कि दबिश के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है लेकिन अन्य विभागों के सहयोग से वे अपने अभियान में लगातार आगे बढ़ रही हैं। उनका मानना है कि यह सम्मान उनकी टीम को काम करने की और भी हिम्मत देगा।


गुलशन कुमार ने ऑनलाइन एमटीपी किट की बिक्री का किया था भंडाफोड़
गुलशन कुमार बताते हैं कि वह एक साल से कुरुक्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, और यह उनकी पहली नियुक्ति है। इस दौरान, उन्होंने अपने कार्यालय में ऑनलाइन एमटीपी किट मंगवाकर एक गिरोह को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई थी। पिछले एक साल से वह जिले के मेडिकल स्टोरों पर दबिश मारकर नशे की दवाइयों को पकड़ने और प्रदेश को नशा मुक्त बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं।
उनका कहना है कि औषधि नियंत्रण विभाग जिले में हर उस दवा तस्कर तक पहुंचने के लिए प्रयासरत है, जो नशे की दवाओं को खरीदता व बेचता है। उनका मानना है कि केवल इन लोगों पर रोक लगाकर ही प्रदेश को नशा मुक्त बनाया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने यह भी माना कि कुछ चुनौतियां उनके सामने रहती हैं। मेडिकल संचालकों के पास दवाइयों का वैध लाइसेंस होता है, और वे इन दवाइयों को नशे के रूप में बेचते हैं, जिससे उन्हें पकड़ने में काफी कठिनाइयां होती हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मान सरकार को अधिकारियों व कर्मचारियों को देते रहना चाहिए, जिससे उनको प्रोत्साहन मिलता रहता है।
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