मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की तरफ से कुरुक्षेत्र, यमुनानगर व कैथल जिलों के 93 गांवों के पर्यटन और तीर्थ स्थलों को विकसित करने की योजना तैयार की गई है। इसके तहत सरस्वती नदी के किनारे बने सभी श्मशान घाटों के पास अस्थियां विसर्जित करने के लिए तालाब बनाए जाएंगे और इन तालाबों का नाम सरस्वती घाट रखा जाएगा। इस नदी के जल को स्वच्छ रखने के लिए करीब 100 गंदे नालों को भी बंद किया जाएगा।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को पुरुषोत्तमपुरा बाग में हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की तरफ से सरस्वती प्रोजेक्ट मॉडल का अवलोकन करने के दौरान ये बातें कही। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत आदिबद्री से लेकर कैथल के लैंडरकिमा-आंधली गांव पंजाब सीमा तक 204 किलोमीटर तक के मेन चैनल और उसके उपरांत 150 किलोमीटर सरस्वती धाराएं विकसित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि यमुनानगर जिले के 45, कैथल के 21 और कुरुक्षेत्र जिले के 27 गांवों के तीर्थ व पर्यटन स्थलों को विकसित करने की योजना है।
उन्होंने कहा कि योजना पर तेजी से कार्य किया जाएगा ताकि सरस्वती नदी की जल धारा को फिर से धरातल पर प्रवाहित किया जा सके और इस पवित्र नदी के किनारे तीर्थों और पर्यटन स्थलों को विकसित किया जा सके। इस अवसर पर हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष कवंरपाल, हरियाणा के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु, कृषि मंत्री ओपी धनखड़, नगर निकाए मंत्री कविता जैन, पर्यटन एवं शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा, परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार, सांसद राजकुमार सैनी,आरएसएस के वरिष्ठ नेता इन्द्रेश, राज्यमंत्री कर्ण देव कंबोज, राज्यमंत्री कृष्ण बेदी, राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी, विधानसभा के उपाध्यक्ष संतोष यादव, मुख्य संसदीय सचिव श्याम सिंह राणा, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, विधायक सुभाष सुधा, विधायक डा. पवन सैनी, विधायक बिक्रम सिंह यादव, हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रशांत भारद्वाज, मुख्य सचिव डीएस ढेसी, जिला परिषद के चेयरमैन गुरदयाल सुनहेड़ी, भाजपा के जिला अध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर सहित जिला प्रशासन के अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद थे।
सरस्वती नदी के पुन: जागरण अत्यंत स्तुति योग्य
राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि सरस्वती नदी के पुन: जागरण का प्रयास अत्यंत स्तुति योग्य है। यह प्रयास हमारी विरासत को पुन: स्थापित करेंगे। इसके अलावा इस पुस्तिका में हरियाणा विधानसभा की उपाध्यक्ष संतोष यादव और पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य रमेश पाल ने भी इस योजना पर विचार व्यक्त किए है।