अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के दौरान पुरुषोत्तमपुरा बाग में प्रात:कालीन सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ एनआईटी के निदेशक डॉ. सतीश कुमार ने किया। कार्यक्रम का आगाज राजस्थान के पारंपरिक गीत केसरिया बालमा पधारो म्हारे देश से हुआ। इसके बाद राजस्थानी नृत्यावली भवई का प्रदर्शन हुआ। तलवार व गिलास पर किए गए नृत्य से पर्यटक रोमांचित हो उठे।
अगली प्रस्तुति उड़ीसा के कलाकारों की गोटी पूआ नृत्य थी। इस नृत्य की विशेषता यह है कि इसमें लड़के लड़कियों के भेष में भगवान जगन्नाथ की स्तुति करते हैं। गोटी पूआ नृत्यावली में हिरण्यकश्यप अवतार, द्रोपदी चीर हरण का भी संजीव चित्रण कलाकारों द्वारा किया गया। इसके बाद मणीपुर के कलाकारों ने जैसे ही मणीपुर रास किया और बांसुरी के सूर छेड़े तो फिजा वृंदामय हो गई। कान्हा द्वारा राधा संग खेली गई होली को देखकर दर्शक झूम उठे।
अगली प्रस्तुति झारखंड के कलाकारों के छऊ नृत्य की थी। इसमें कलाकारों ने अपने नृत्य के माध्यम से चक्र व्यूह रचना का पूरा विवरण दर्शाया। उधर, जम्मू-कश्मीर के कलाकारों ने रूफ नृत्य की प्रस्तुति दी। असम के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य बिहू की प्रस्तुति दी। इसमें किसानों द्वारा फसल पकने पर खुशी का इजहार करते हुए किया जाता है। पंजाब से आए कलाकारों ने मार्शल आर्ट गतका की प्रस्तुति दी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अंतिम प्रस्तुति उत्तर प्रदेश की मयूर नृत्य की थी। इसमें राधा के लिए भगवान श्रीकृष्ण द्वारा मोर का रूप धरकर किए गए नृत्य ने पंडाल की फिजा बिखेरी।
इस अवसर पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सीओ गौरव अंतिल एवं एसडीएम नरवाना डॉ. किरन ने मेहमानों को सम्मानित किया। मौके पर लाडवा के विधायक डा. पवन सैनी, उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक कलां मंच के निदेशक आरएस गिल, अंबाला नगर निगम के संयुक्त आयुक्त गगन दीप, नारी सशक्तीकरण मंच की अध्यक्ष दीपांतल, बीजेपी जिलाध्यक्ष धर्मबीर मिर्जापुर, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बांसुरी वादक उस्ताद मुस्तफा खान आदि मौजूद थे।