कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर के पावन तटों पर भारतीय संस्कृति की महक को दूर-दूर तक महसूस किया जा रहा है। इस संस्कृति की महक का एहसास करने के बाद एकाएक शहर और प्रदेश के लोग अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की ओर खिंचे चले आ रहे है। इस महोत्सव में जहां शिल्पकार अपनी शिल्पकला से पर्यटकों को मोहित कर रहे है, वहीं विभिन्न प्रदेशों के लोक कलाकार पर्यटकों का खूब मनोरंजन कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव शिल्प और सरस मेले के चौथे दिन सुबह और शाम के समय दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों का पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर के लोक कलाकारों ने मनोरंजन करने का काम किया। उत्तरी तट पर जहां राजस्थानी लोक कलाकार कच्ची घोड़ी नृत्य की प्रस्तुति देकर पर्यटकों को नृत्य करने के लिए उत्साहित हो गए। उत्तर पश्चिमी तट पर बीन-बांसुरी की धुन पर लोक कलाकार भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। इस पावन तट के चारों तरफ किसी न किसी प्रदेश के कलाकर, बाजीगर, बहरुपिए भी पर्यटकों को लुभा रहे हैं।
मंगलवार को इस शिल्प मेले की रौनक को बढ़ाने का काम विभिन्न राज्यों से आए पर्यटकों व विद्यार्थियों ने किया। आसमान ने छाई काली घटा ने महोत्सव के माहौल को और भी मनमोहक कर दिया, बूंदाबांदी के बीच महोत्सव में आए विद्यार्थियों व पर्यटकों ने विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का जमकर लुत्फ उठाया। बच्चे, जवान और बुजुर्गों ने महोत्सव में जमकर खरीदारी की और विभिन्न प्रदेशों से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों खूब मस्ती से नृत्य किया।
विभिन्न राज्यों की संस्कृति बनी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के पावन पर्व पर ब्रह्मसरोवर विभिन्न राज्यों की संस्कृति को अपने आगोश में समेट रहा है। इस तट पर विभिन्न राज्यों की संस्कृति पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। तट पर भारत के विभिन्न राज्यों की संस्कृति को एक साथ देखने का मौका मिल रहा है। शिल्प मेले के चौथे दिन चारों तरफ शिल्पकला की छोटी-छोटी दुकानों पर पर्यटक खरीदारी कर रहे हैं। यह दुकानें भारतीय शिल्पकला के सौंदर्य को भी चरितार्थ कर रही हैं।