From September 15 to begin procurement of paddy, Ismailabad
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अनाजमंडी में पीआर किस्म की धान की आवक जोरों पर है लेकिन धान की सरकारी खरीद न होने कारण किसानों में खासा रोष व्याप्त है। सरकारी खरीद न होने के कारण किसानों को अपना पीला सोना औने पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसान जगतार सिंह, चरणजीत सिंह, संदीप, अजमेर सिंह, फग्गा सिंह, सिंदा राम आदि ने बताया उनकी पीआर किस्म की धान की फसल पक्का कर तैयार है।
धान की कटाई के बाद वे धान को बिकवाली के लिए बुधवार को कस्बे की अनाजमंडी में लेकर आए थे लेकिन धान की सरकारी खरीद न होने कारण उन्हें अपना धान प्राइवेट खरीददारों को 1300 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जबकि सरकारी रेट 1510 रुपये का है। उन्हें 4000 से 5000 रुपये प्रति एकड़ का नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सरकार को 15 सितंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू करनी चाहिए ताकि किसानों को अपनी फसल औने पौने दामों पर बेचने पर मजबूर न होना पड़े।
राइस मिलरों का कथन
राइस मिलर अधिकारी ने कहा कि अब जो पीआर किस्म का धान अनाजमंडी में बिकवाली के लिए आ रही है। वह नमी युक्त है। उन्होंने कहा कि कम दिनों में पकने वाली धान के प्रति क्विंटल धान से 60 से 62 किलो चावल निकलता है। जबकि सरकार को 67 किलो चावल देना पड़ता है। इसलिए इस समय आ रही धान को सरकारी रेट पर खरीदने में उन्हें नुकसान झेलना पड़ रहा है।