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Kurukshetra News: मरीजों के मस्तिष्क में मिले चार से सात मिमी के परजीवी

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कुरुक्षेत्र। अगर आप भी साफ किए और धोए बगैर कच्ची सब्जियों का सेवन करते हैं तो सावधान हो जाएं। नहीं तो आप भी न्यूरोसिस्टेकिरॉसिस समस्या से ग्रस्त हो सकते हैं। एलएनजेपी अस्पताल में पिछले सप्ताह दो मरीज इस समस्या के ग्रस्त मिले हैं, जिनका उपचार चल रहा है। दरअसल, इसमें टेपवर्म या टीनिया सोलियम परजीवी कीड़ा मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। आगे यह कीड़ा मस्तिष्क के अंदर ही अंडे देकर अपने में इजाफा कर लेता है। इससे पीड़ित की कई बार मौत भी हो जाती है।
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जिला यमुनानगर के मछरौली गांव से अस्पताल में आए 65 साल के व्यक्ति ने बताया कि वह खेतीबाड़ी का काम करता है। पिछले कई दिनों से उसके सिर में तेज दर्द हो रहा था। कई बार ताे दवा खाने से भी उसको आराम नहीं मिलता था। चार दिन पहले अचानक उसे दौरा पड़ा तो परिजन उसे अस्पताल ले गए, जहां वह एलएनजेपी अस्पताल आ गया। यहां सीटी स्कैन कराया तो रिपोर्ट से पता चला कि उसके मस्तिष्क में कई मल्टीपल कीड़े मिले, जिनकी लंबाई चार से सात मिलीमीटर है, वहीं पिछले सप्ताह भी एक अन्य व्यक्ति न्यूरोसिस्टेकिरॉसिस समस्या के इलाज के लिए आया था। अभी दोनों का उपचार चल रहा है।

रक्त के जरिए मस्तिष्क तक पहुंचता है टेपवर्म
जिला अस्पताल के हृदय एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि पत्ता गोभी समेत खाने-पीने की कच्ची और गंदी चीजों को खाने से शरीर में टेपवर्म पहुंच सकता है। टेपवर्म लोगों की आंतों में रहता है, जबकि रक्त के जरिए मस्तिष्क में पहुंच जाती है, लेकिन मरीज को इसका पता ही नहीं चलता है। कई बार मस्तिष्क में मल्टीपल या 100-150 तक परजीवी हो सकते हैं, जिससे उनकी मौत भी हो सकती है।
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14 से 21 दिन तक चलेगा उपचार
डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि इस अवस्था में कोमा में जाने का खतरा होता है। सिरदर्द, मिर्गी के दौरा पड़ सकता है। मस्तिष्क में सूजन आ सकती है। इससे आंखों के सामने अंधेरा और अधरंग की समस्या भी हो सकती है। स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर मौत भी हो सकती है, लेकिन ऐसा बहुत कम देखने में आता है। मरीज का 14 से 21 दिन तक इलाज चलता है। इससे यह परजीवी कीड़े अंदर ही मर जाते हैं, क्योंकि ऑपरेशन करके इनको बाहर निकालना संभव नहीं है। मरीज को एल्बेंडाजोल और प्राजीक्विंटेल दवा देकर इलाज किया जाता है।
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