पिहोवा। उदासीन श्री ब्रह्म अखाड़ा साहिब मांडी में बाबा श्री चंद महाराज के 531वें प्रकाश उत्सव क
- फोटो : udhampur news
पिहोवा (कुरुक्षेत्र)। श्री गुरु नानक देव के पुत्र बाबा श्री चन्द महाराज ने उनके सिद्धांतों व जीवन मूल्यों को अपनाकर मानव कल्याण की परंपरा को आगे बढ़ाया था। श्री गुरु नानक देव के दो पुत्रों में से ज्येष्ठ पुत्र बाबा श्री चन्द जी महाराज का ध्यान बचपन से ही भक्ति की ओर था। उन्होंने मानव कल्याण के लिए जीवन भर अनेक कार्य किए और बाद में शरीर का त्याग कर ब्रह्मलीन हो गए। ये बात मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कही। वे शनिवार को उदासीन श्री ब्रहम् अखाड़ा साहिब मांडी में बाबा श्री चन्द महाराज के 531वें प्रकाश उत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे। इससे पहले गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी में माथा टेका।
उन्होंने कहा कि सरकार श्री गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान दिवस के उपलक्ष में 350वें शहीदी दिवस पर 25 नवंबर को ज्योतिसर में राष्ट्र स्तरीय कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिरकत करेंगे। इसमें संगत को भी बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उदासीन श्री ब्रहम अखाड़ा साहिब श्री गुरुओं के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए रक्तदान शिविर, गरीब कन्याओं का विवाह, खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन करते रहते हैं। बाबा श्री चन्द महाराज का अनुसरण करते हुए बाबा गुरविन्दर सिंह महाराज ने समर्पण भाव व उत्साह के साथ अनेक व्यक्तियों में प्रेम, प्यार, भाईचारे, जनसेवा और जीवन में सफल होने की दृढ़ आकांक्षा को जगाया है। इस महान कार्य को अंजाम देने के लिए ही इन्होंने उदासीन श्री ब्रहम अखाड़ा साहिब की स्थापना की।
मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि हम महान गुरुओं के सद्भाव, सहनशीलता, भाईचारे और आपसी प्रेम के संदेश को अपने जीवन में उतारें। समय की जरूरत है कि हमारी नई पीढ़ी आधुनिक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सके और वह अपनी उच्च प्राचीन संस्कृति को भी न भूलें। इस दिशा में हमारे संत-महात्माओं की रचनात्मक भूमिका की देश व समाज को बड़ी जरूरत है। मौके पर पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, राजनीतिक सलाहकार भारत भूषण भारती, उदासीन श्री ब्रहम अखाड़ा साहिब के संस्थापक बाबा गुरविन्दर सिंह महाराज, जिला अध्यक्ष तिजेंदर सिंह गोल्डी, जिप चेयरपर्सन कंवलजीत कौर, भाजपा नेता जयभगवान शर्मा डीडी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति व साध संगत मौजूद रही।