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मारकंडा नदी में बढ़ते जलस्तर से हाई अलर्ट

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floud - फोटो : Kurukshetra
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कालाअंब से मारंकडा नदी में 35 हजार क्यूसिक से ज्यादा पानी आने से सीमावर्ती गांवों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने शाहाबाद में कंट्रोल रूम बनाया है, जिससे किसी आपात स्थिति से निपटा जा सके। इसके अलावा रविवार तड़के उपायुक्त ने शाहाबाद के कई गांवों का दौरा कर जमीनी तैयारियों की हकीकत भी जानी। वहीं, इलाके के गांवों में नदी के पानी बढ़ने के बाद से हड़कंप की स्थिति है। ग्रामीणों ने हजारों एकड़ फसल डूबने की आशंका जताई है।
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राजस्व व सिंचाई विभाग के अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार मारकंडा नदी में रविवार सुबह कालाअंब से 35 हजार 664 क्यूसिक पानी छोड़ा गया जबकि मुलाना से 30740, शाहाबाद में 5151 तथा झांसा में 6248 क्यूसिक पानी छोड़ा गया। इसलिए मारकंडा नदी पर प्रशासन की तरफ से निरंतर नजर रखी जा रही है। इस स्थिति के बारे राजस्व व सिंचाई विभाग के अधिकारी पल पल की खबर प्रशासन को मुहैया करवा रहें है, ताकि प्रशासन किसी भी स्थिति पर नियंत्रण कर सके। वहीं, रविवार तड़के हाई अलर्ट जारी होने के बाद उपायुक्त डॉ. एसएस फुलिया ने शाहाबाद के गांव कलसाना, कटवा, मुगलमाजरा, तंगौर, दामली, दयालपुर व गुमटी सहित अन्य गांवों का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की। जबकि नदी का जल स्तर बढ़ने से पानी तटबंधों को छू रहा है। आशंका है कि रात्रि के समय मारकंडा नदी का जल स्तर और अधिक बढ़ गया तो हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो सकती है।
इस तरह बढ़ा नदी का जलस्तर
समाचार लिखे जाने तक मारकंडा नदी में करीब 14 हजार क्यूसेक पानी बह रहा था, जो कि अलसुबह 6 बजे मात्र 1900 क्यूसेक था। सुबह 7 बजे यह बढ़कर 3 हजार क्यूसेक, 8 बजे 7500 क्यूसेक, दोपहर दो बजे 8 हजार क्यूसेक, 3 बजे 9 हजार क्यूसेक तथा सायं 4 बजे 10 हजार क्यूसेक तथा 6 बजे यह पानी 14 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया था। गेज रीडर रोशन लाल ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा नदी पर नजर रखी हुई है और हर घंटे बाद गेज मापकर प्रशासन को सूचित किया जा रहा है। आंशका जताई जा रही है कि मारकंडा नदी का जलस्तर देर रात को और बढ़ सकता है। प्रशासन द्वारा बढ़ते जलस्तर पर निगाह रखी जा रही है।
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इन क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा
पहाड़ों से छोड़ा गया पानी एवं बरसात का पानी निकटवर्ती बाजीगर कॉलोनी, गांव मुगल माजरा, गुमटी, मलिकपुर, रावा, कलसाना, कठवा, तंगौर, झरौली अरूपनगर तथा नदी के साथ लगते गांवों में नुकसान पहुंचाता है। वहीं इस्माईलाबाद क्षेत्र के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आते हैं।
नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण भयभीत
गांव कठवा के सरपंच अमरिंद्र सिंह ने कहा है कि बाढ़ के पानी के कारण गांव कलसाना, मलिक पुर, मुगलमाजरा, अरूप नगर, गुमटी, कठुवा सहित अनेक गांवों में हजारों एकड़ की फसलों का नुकसान हुआ है। किसानों के सामने पशुओं के चारे की समस्या भी पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि अगर नहर विभाग व कृषि विभाग समय रहते बाढ़ को रोकने का प्रबंध करते तो काफी हद तक बचा जा सकता था। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष सिंचाई विभाग के आलाधिकारियों को मौके पर बुलाकर स्थिति से अवगत कराया गया था कि नदी की व्यवस्थित ढंग से कभी सफाई नहीं होती, जिसकी वजह से पानी की निकासी बाधित होती है। बताया कि हर बार ऐसी स्थिति में किसानों की हजारों एकड़ फसल पूर्णात: नष्ट हो जाती है।
बचाव की तैयारियां पूरी, नहीं होगा समस्या
मारंकडा नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। इसके लिए तैयारी कर ली गई है। प्रशासन द्वारा नौकाओं, गोताखोरों एवं रस्सों इत्यादि की व्यवस्था की गई है तथा तहसील कार्यालय मश्ें कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि यदि 50 से 60 हजार क्यूसिक तक पानी आता है तो चिंता की कोई बात नहीं, लेकिन बाढ़ का पानी लाखों क्यूसेक में आता है तो ज्यादा नुकसान होने की आशंका बनी रहती है।
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