महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच के रूप में शुरू की गई हेल्पलाइन नं. 1091
पुलिस के लिए जंजाल बनती जा रही है। हेल्प लाइन पर शिकायत मिलने के बाद
पुलिस की मशक्कत शुरू हो जाती है, लेकिन सुबह जाकर पता चलता है कि दोनों
पक्षों में समझौता हो गया है।
हालांकि, महिला थाने खोले जाने से इस हेल्प
लाइन पर मिलने वाली शिकायतों में कमी आई है। इससे पुलिस को भी कुछ राहत
मिलने लगी है।महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों पर जल्द कार्रवाई के
लिए अंकुश लगाने के उद्देश्य से प्रदेश के पुलिस विभाग ने 30 अक्तूबर 2012
को महिला हेल्पलाइन शुरू की थी। आरंभ में यह हेल्प लाइन हर जिला मुख्यालय
पर पुलिस कंट्रोल रूम में स्थापित की गई थी।
प्रदेश भर में महिला पुलिस
थाने स्थापित करने के बाद यह हेल्प लाइन इन पुलिस थानों में स्थानांतरित कर
दी गई। इस हेल्प लाइन का प्रचार सार्वजनिक स्थानों के साथ स्कूल, कॉलेज
आदि शिक्षण संस्थाओं में भी किया गया।
इसके बाद घरेलू हिंसा से लेकर
छेड़छाड़ और मारपीट तक के मामले इस हेल्पलाइन के माध्यम से पुलिस तक
पहुंचने लगे। आरंभ में पुलिस को इस हेल्प लाइन पर मिली कई सूचनाएं सही
मिली, लेकिन लंबे समय से आधारहीन खबरें भी इस पर आ रही हैं।
15 मिनट बाद हो जाता है समझौता
महिला
हेल्प लाइन पर सूचना अधिकतर घरेलू हिंसा और कलह से संबंधित आ रही है।
सूचना पर पुलिस पहुंचती है, तो मौके पर समझौता हुआ मिलता है। इसके बाद
पुलिस बिना कार्रवाई के लौट आती है। आंकड़ों के अनुसार 90 फिसदी मामले अगले
आधे घंटे के अंदर सुलझ जाते हैं।
4 से 5 सूचनाएं आ रहीं रोज
इस
हेल्प लाइन पर महिला थाने बनने के बाद आने वाली सूचनाओं में कमी आई है।
पहले 20 से 25 सूचनाएं 24 घंटे के दौरान महिलाओं से संबधित विभिन्न मामलों
की आती थीं। अब महज 4 से 5 सूचनाएं आ रही हैं। इनमें भी घरेलू कलह से
संबंधित अधिक होती है।
छात्राओं ने कम किया उपयोग
महिला
हेल्प लाइन पर अब तक 2,993 सूचनाएं आई हैं। इनमें से स्कूल, कॉलेज,
यूनिवर्सिटी आदि शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राओं ने बहुत कम
शिकायत की है। पिछले 3 माह में यूनिवर्सिटी की एक छात्रा ने ही हेल्प लाइन
पर संपर्क किया है।
झूठी सूचनाएं तेजी से बढ़ रहीं : एसएचओ
महिला
थाना एसएचओ कुसुमलता ने बताया कि पुलिस हर सूचना पर तत्काल एक्शन लेती है।
लेकिन, अधिकतर सूचनाएं मौके पर पहुंचने पर गलत साबित होती हैं। कई बार तो
दिया गया पता भी गलत होता है तो कई बार पुलिस के जाने से पहले ही मामला
निपट जाता है। कई बार बिना जरूरत की बात पर भी हेल्पलाईन पर सूचित किया
जाता है, जिससे पुलिस को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।