कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दिखाई दिया, जिसमें न केवल भारतीय संस्कृति और कला की झलक दिखी, बल्कि विदेशी शिल्पकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया।
महोत्सव में सहभागी देश तंजानिया के साथ-साथ उज्बेकिस्तान और तजाकिस्तान के भी शिल्पकार पहुंचे हैं। ब्रह्मसरोवर तट पर पुरुषोत्तमपुरा बाग के मुख्य मंच के एक ओर तंजानिया का पवेलियन सजाया गया तो वहीं दूसरी ओर उज्जबेकिस्तान व तजाकिस्तान के शिल्पकारों के स्टॉल सजे हैं।
इनमें 20 शिल्पकार उज्बेकिस्तान के तो छह तजाकिस्तान के हैं। तंजानिया के लोक कलाकार भी पहुंचे हैं, जाे अपनी लोक कला से महोत्सव को सराबोर करेंगे। पुरुषोत्तमपुरा बाग में उज्बेकिस्तान और तजाकिस्तान के शिल्पकारों ने अपने देश की पारंपरिक हस्तनिर्मित वस्तुएं और स्वादिष्ट व्यंजनों के जरिए पर्यटकों का दिल जीत लिया।
महोत्सव में अपनी कलाकृतियों को प्रदर्शित करने आए विदेशी कलाकार भारतीय संस्कृति और सभ्यता से काफी प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि वे पहली बार अपने देश की कला और संस्कृति को इतने बड़े मंच पर प्रदर्शित कर रहे हैं। भारतीय लोगों से मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया ने उन्हें और भी अभिभूत कर दिया है। गीता महोत्सव ने भारतीय और विदेशी संस्कृतियों के बीच एक सेतु का काम किया है। यह आयोजन दिखाता है कि कला और संस्कृति की कोई सीमा नहीं होती। एक ओर भारतीय दर्शक विदेशी कलाकृतियों और व्यंजनों का आनंद ले रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर विदेशी शिल्पकार और कलाकार भी भारतीय संस्कृति को महोत्सव के माध्यम से देख पा रहे हैं।
गीता की धरती पर आने का मिला अनोखा अवसर : शहनाज : विदेशी शिल्पकारों का नेतृत्व कर रही शहनाज का कहना है कि गीता महोत्सव उनके लिए एक अनोखा अवसर है, जहां वे अपने देश की कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत कर रहे हैं। उनका कहना है कि भारतीय लोग हमारे काम को सराह रहे हैं, जो हमारे लिए गर्व की बात है, यहां आकर बहुत खुशी हो रही है। उन्होंने पवेलियन में उज्बेकिस्तान की मशहूर डिश मोशखोर्दा और ओश की स्टॉल लगाई है, जिसे लोग बहुत पसंद कर रहे हैं।
गीता महोत्सव में विदेशी शिल्पकारों की अनदेखी : गीता महोत्सव में उज्बेकिस्तान और तजाकिस्तान के शिल्पकारों की उम्मीदों को उस समय ठेस भी पहुंची जब उनके स्टॉल पर कोई भी अतिथि नहीं पहुंचा। पुरुषोत्तमपुरा बाग में अपनी कला और संस्कृति को अतिथियों के समक्ष रखने के लिए शिल्पकार उत्सुक नजर आए तथा अतिथियों के आने की बाट जोहते रहे लेकिन मुख्यमंत्री से लेकर कोई भी अतिथि नहीं आए, जिसको लेकर शिल्पकार उदास दिखाई दिए। उधर राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री सहित अन्य अतिथि ने तंजानिया पवेलियन और हरियाणा पवेलियन में पहुंचे तथा कलाकृतियों की सराहना भी की। वहीं उज्बेकिस्तान और तजाकिस्तान के शिल्पकार अतिथियों से अपनी कला की सराहना की उम्मीद कर रहे थे, पूरे समय बाट जोहते रह गए। इससे आयोजकों की योजना और समन्वय में भी कमी दिखाई दी।
कुरुक्षेत्र। उज्बेकिस्तान के कलाकारों द्वारा लगाई गई स्टाल पर खरीददारी करते पर्यटक। संवाद
कुरुक्षेत्र। उज्बेकिस्तान के कलाकारों द्वारा लगाई गई स्टाल पर खरीददारी करते पर्यटक। संवाद