कुरुक्षेत्र। खराब बीज दिए जाने से बिफरे किसानों ने नई अनाज मंडी के निकट रोड जाम कर प्रदर्शन किया। लोगों ने बीज विक्रेता की दुकान के समक्ष ही नारेबाजी करते हुए यातायात बाधित रखा।
हालांकि उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर पुलिस और जिला बागवानी अधिकारी ने जाम खुलवा दिया।
प्रदर्शनकारी आलमपुर निवासी किसान सचिन ने बताया कि उसने अनाज मंडी के निकट एक फर्म से मटर का बीज खरीदा था, जो कि उसने पौने एकड़ में लगाया, लेकिन बाद में उत्पादन काफी हद तक प्रभावित हुआ। इसके बारे में उसने जिला बागवानी विभाग में जांच के लिए गुहार लगाई।
इसके बाद विभाग की एक टीम ने मौके पर पहुंच कर जांच की और पाया कि फसल के बीज में करीब 40 प्रतिशत तक खराबी थी, जिसका प्रभाव फसल पर पड़ा है। सचिन और अन्य प्रदर्शनकारियों ने बताया कि फर्म के खिलाफ यदि कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो फिर संचालक इसी तरह किसानों को ठगता रहेगा।
इसी मांग को लेकर उन्होंने नई अनाज मंडी के निकट सड़क पर जाम लगा दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने फर्म के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहीं, जाम की सूचना मिलते ही सिटी एसएचओ, केयूके थाना एसएचओ और पुलिस बल मौके पर पहुंचे, जबकि सूचना मिलने पर जिला बागवानी अधिकारी डॉ. मनजीत सिंह भी वहां पहुंच गए। पुलिस और डॉ. मनजीत सिंह ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन वे फर्म के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर अड़े रहे।
इसके बाद जिला बागवानी अधिकारी ने तुरंत प्रभाव से फर्म के नाम नोटिस निकालकर संचालक को किसान की संतुष्टि करने को कहा। नोटिस दिए जाने के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए और उन्होंने जाम खोला।
जिला बागवानी अधिकारी डॉ. मनजीत सिंह ने बताया कि किसान सचिन ने अक्तूबर 2013 में मैसर्ज महादेव बीज भंडार से मटर का बीज खरीदा था और जनवरी 2014 को उनके पास किसान ने शिकायत की, फसल में दिक्कत आई है।
इसके बाद तीन सदस्यीय कमेटी ने मौके पर जाकर जांच की तो पता लगा कि बीज में करीब 40 प्रतिशत तक खराबी थी, जिस कारण फसल ठीक नहीं हो पाई। डॉ. सिंह ने बताया कि इसके बाद बीज खराब होने की जानकारी किसान को दे दी थी।
जिला बागवानी अधिकारी डॉ. मनजीत सिंह ने बताया कि मैसर्ज महादेव बीज भंडार को नोटिस दे दिया है। नोटिस में बीज खराब होने की बात कहते हुए फर्म संचालक को किसान से संपर्क कर उसकी समस्या का हल करने को कहा है। उन्होंने बताया कि यदि ऐसा नहीं होता तो फिर अगली कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसान चाहे तो उपभोक्ता अदालत में इस बारे में शिकायत दे सकता है।