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प्रदेश का किसान कड़ी मेहनत और सूझबूझ से बदल रहा खेती की परिभाषा : श्याम सिंह राणा

Sun, 15 Feb 2026 03:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
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पिहोवा। प्रदेश सरकार के सहयोग से प्रदेश का किसान कड़ी मेहनत और सूझबूझ से खेती की परिभाषा बदल रहा हैं। आधुनिक तकनीक और प्रगति से जिला के किसान उत्तम तकनीक के साथ खेती करने में पूरे प्रदेश का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
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ये विचार राज्य कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने शनिवार को गांव तलहेडी में एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत आयोजित जिला स्तरीय सेमिनार में व्यक्त किए। कृषि मंत्री ने कहा कि संरक्षित खेती में नेट हाउस के माध्यम से प्रतिकूल मौसम में भी किसान वर्ग सब्जियों का भरपूर उत्पादन कर रहे हैं। फलों की खेती में अमरूद, नाशपाती और मशरूम की यूनिट लगाकर नए आयाम स्थापित कर किसान एक सफल उद्यमी बन रहें है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है। प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र बहाल होता है। किसानों की बाहरी बाजार पर निर्भरता कम होती है। जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक लचीलापन मिलता है और सबसे बढ़कर हमारी भावी पीढि़यों के लिए सुरक्षित और फल सब्जियां स्वस्थ भोजन और पर्यावरण मिलता है। इस दौरान भाजपा नेता जयभगवान शर्मा डीडी, पशुधन विकास बोर्ड चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर, बागवानी विभाग के निदेशक डॉ जोगिंदर सिंह, संदीप सुपरवाइजर, प्रताप सिंह राणा, विकास कश्यप, अमित यादव, श्याम सिंह, सुपरवाइजर संदीप सिंह, अर्जुन सिंह, यादवेंद्र सिंह मशरूम फार्मिंग तलहेडी, हरपाल सिंह मशरूम फार्मिंग तलहेडी सहित अन्य व्यक्ति मौजूद रहे।
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किसानों को वितरित किए चेक

कृषि मंत्री ने सेमिनार के दौरान किसानों को सब्सिडी के राशि के चेक भेंट किए गए। इनमें तारा रानी को नेट हाउस के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी का 11 लाख, निर्मल सिंह दो लाख 40 हजार, कुलवंत कौर दो लाख 45 हजार की राशि विभाग का चेक सौंपा गया। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को बागवानी विभाग द्वारा सम्मानित भी किया गया। कृषि विभाग, मत्स्य पालन विभाग, पशुपालन विभाग द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई। खंड कृषि अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि देसी गाय पर खरीदने पर सरकार द्वारा 30 हजार रुपए और तीन हजार रुपए चार ड्रम खरीदने पर अनुदान राशि विभाग द्वारा दी जाती हैं।
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प्रेमपाल ने देसी उत्पादों की दी जानकारी

पिछले छह सालों से प्राकृतिक खेती करने वाले उमरी गांव निवासी प्रेमपाल ने कहा कि जो प्राकृतिक खेती से देसी अलसी, तिल, घी, मुरब्बे, आचार, सब्जियां, दूध सहित विभिन्न प्रकार के समान प्राकृतिक तरीके से बना रहे हैं। उन्होंने इन उत्पादों को तैयार करने की जानकारी दी।
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