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अब देश भर के किसान एकजुट होकर छेड़ेंगे आरपार का आंदोलन

Sun, 05 Mar 2017 11:49 PM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
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farmers national conference - फोटो : अमर उजाला
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अब देश भर के किसान एक बैनर के नीचे अपने हकों के लिए आंदोलन चलाएंगे। इसके लिए अगले वर्ष 23 जनवरी को दिल्ली में आंदोलन किया जाएगा। जबकि इससे पहले सभी राज्यों में 9 अगस्त को सांकेतिक प्रदर्शन किए जाएंगे। यह ऐलान रविवार को जाट धर्मशाला में हुए किसानों के राष्ट्रीय अधिवेशन में किया गया। जिसमें करीब 20 राज्यों से लगभग 45 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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राष्ट्रीय किसान महा संघ के बैनर तले यह दूसरा अधिवेशन आयोजित किया गया, जबकि इससे पूर्व भोपाल में किसान राष्ट्रीय अधिवेशन में किसान अपनी मांगों पर मंथन कर चुके हैं। अधिवेशन में किसानों की समस्याओं से लेकर उनके हकों व सरकार की नीति पर भी गंभीरता से मंथन किया गया। जिसके साथ ही किसान महासंघ के बैनर तले ही एक साथ लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया गया तो वहीं अभी तक इस संगठन से दूर रहे किसान संगठनों को भी शामिल करने के लिए कमेटी का गठन किया गया। अधिवेशन में खास यह रहा कि स्वामीनाथन आयोग के अध्यक्ष डॉ. एम एस स्वामीनाथन ने खुद ई मेल से संदेश देते हए किसानों की मांगों के प्रति अपनी सहानुभूति जताई है और उन्होंने अपने खराब स्वास्थ्य के चलते इस अधिवेशन में न पहुंच पाने पर अफसोस जताया।

देश भर में बनाए चार जोन : चढूनी
अधिवेशन के उपरांत पत्रकारों से बातचीत करतेे हुए राष्ट्रीय किसान महासंघ कोर कमेटी के सदस्य गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया कि अधिवेशन में चार बिंदुओं पर मुख्य रूप से सहमति बनी है। जिसमें 23 जनवरी 2018 को राष्ट्रीय किसान महासंघ की अगुवाई में देश व्यापी महा संग्राम आंदोलन का बिगुल बजाया जाएगा। आंदोलन की तैयारियों को लेकर 9 अगस्त को देश भर में सांकेतिक रूप से किसान आंदोलन किये जाएंगे। आंदोलनों को सफल बनाने के लिए पूरे देश को चार जोनों में बांटा गया है और किसान संगठनों को एकजुट करने के लिए जिमेवारियां सौंपी गई है, जिसके अनुसार जल्द ही सभी अन्य किसान संगठनों को भी महासंघ में शामिल कर लिया जाएगा।
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किसान बोले, किसान विरोध साबित हुए मोदी
अधिवेशन में पहुंचे किसान प्रतिनिधियों ने एक मत से मोदी सरकार को किसान विरोधी करार देेते हुए वर्तमान भाजपा सरकार को उद्योगपतियों की सरकार होने के भी आरोप लगाए। भोपाल से राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ने कहा कि ये सरकार अब तक की सबसे बड़ी किसान विरोधी सरकार है और यह सरकार कंपनियों से कंपनियों के द्वारा कंपनियों के लिए काम करती है। उत्तरप्रदेश से भारतीय किसान यूनियन (बिलारी ग्रुप) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरपाल सिंह बिलारी ने कहा कि 30 दिसंबर को राष्ट्र के नाम संदेश में प्रधान मंत्री मोदी ने केवल 60 दिन का कोपरेटिव बैंकों का कर्जा माफ करके उनके साथ मजाक किया है जबकि बिलारी का कहना है कि वास्तव में कही इस तरह के कर्जे किसान के ऊपर थे ही नहीं। यह घोषणा सिर्फ छलावा और वाहवाही लूटने के लिए की गई थी।

मोदी सरकार की आयात नीति पर निशाना साधा
केरल से स्वदेशी आंदोलन के प्रतिनिधि बीजू ने मोदी सरकार की आयात नीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने गेहूं का आयात शुल्क खत्म किया, आलू का आयात शुल्क भी 30 प्रतिशत से 10 प्रतिशत किया इसी प्रकार पोमोऑयल का भी आयात शुल्क  35 प्रतिशत से घटा कर सिर्फ साढ़े सात प्रतिशत कर दिया गया। सरकार के यह फैसले खेती और किसान विरोधी है।

दिल्ली भारतीय गो सेवा संकल्प समिति के अध्यक्ष सुरेंदर सिंह वशिष्ट ने कहा कि मोदी सरकार ने पहले तो चुनावी घोषणा पत्र में किसानों से वायदे किये लेकिन सता हाथ लगते ही किसान विरोधी फैसले लेने शुरू कर दिए। जिन का चुनावी घोषणा पत्र में कोई जिक्र नहीं होता। आंध्रप्रदेश से किसान मित्र संगठन के अध्यक्ष शांता कुमार ने कहा कि देश के 70 साल के इतिहास में मोदी सरकार सबसे बड़ी किसान विरोधी सरकार रही है। राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के राष्ट्रीय सचिव बसवराज पाटिल ने कहा कि कृषि के लिए अलग से बजट  बनाया जाए।

पंजाब भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष हरमीत सिंह कादियान ने कहा कि मोदी सरकार आने के बाद देश में किसान आत्महत्या के मामलों में भारी इजाफा हुआ है, जो किसानों की दयनीय हालात को दर्शाता है। वहीं पंजाब से पहुंचे किसान नेता पिसोरा सिंह ने बताया कि मोदी सरकार में उद्योगपतियों के हित में कानून बने है न कि किसानों के हित में। इस दौरान सुरेश कौथ, शमशेर दहिया, शांता कुमार सहित अन्य किसान नेताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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