कुरुक्षेत्र। कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र ने सुनहेड़ी खालसा के 25 किसानों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण दिया। यह प्रशिक्षण 15 से 19 सितंबर तक चला। इसमें फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान और पराली के उचित उपयोग पर जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि अवशेषों का उचित प्रबंधन खेत और मिट्टी दोनों के लिए उपयोगी है।
प्रशिक्षण में किसानों को डिकंपोजर के माध्यम से फसल अवशेषों को जैविक तरीके से गलाकर मिट्टी में मिलाने का तरीका सिखाया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ समन्वयक डॉ. बलजीत सिंह सहारण ने इस प्रशिक्षण का नेतृत्व किया। वैज्ञानिक डॉ. सरिता रानी ने अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान और उचित प्रबंधन के लाभ बताए। डॉ. कविता ने खेत में अवशेष मिलाने से मिट्टी के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव समझाए। डॉ. बलजीत सिंह सहारण ने किसानों से अवशेषों में आग न लगाने की अपील की।
विशेषज्ञों ने दी विस्तृत जानकारी
डॉ. फतेह सिंह ने अवशेषों से खुंब उत्पादन के बारे में बताया। डॉ. अश्वनी कुमार ने फसल रोगों की पहचान व उपचार की जानकारी दी। डॉ. मनोज कुमार ने कृषि वानिकी से जुड़े पहलुओं पर प्रकाश डाला। कृषि विभाग के उपनिदेशक गिरीश नागपाल ने सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। भारत वाही ने कृषि यंत्रों पर मिलने वाले अनुदान व पंजीकरण समझाया। सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ओपी लठवाल ने फसल विविधीकरण पर मार्गदर्शन किया।