कुरुक्षेत्र। रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को रोकना होगा। इसके लिए किसानों को प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा और किसानों को फसल विविधीकरण पर भी अपना फोकस रखना होगा। इन तमाम पहलुओं पर गौर करने के बाद किसान अपनी आय में इजाफा करने के साथ-साथ मनुष्य के जीवन को स्वस्थ बनाने में अपना योगदान दे सकते हैं। यह आह्वान चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति प्रोफेसर बीआर कांबोज ने किया।
वे रविवार को कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित प्राकृतिक खेती विषय पर किसान मेले में बोल रहे थे। इससे पहले कुलपति प्रोफेसर बीआर कांबोज, विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह मंडल, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ समन्वयक डॉ. नसीब सिंह ने मेले का उद्घाटन किया और किसान मेले में किसानों द्वारा लगाए गए उत्पादों का अवलोकन भी किया। प्रगतिशील किसान हरबीर तूर तथा धरमपाल मेहरा ने भी मुख्य अतिथि का अभिनंदन किया। मेले में 500 किसानों ने शिरकत की।
कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने कहा कि किसान जीवामृत, घनजीवामृत एवं प्राकृतिक खेती के अन्य घटकों का उपयोग करके मिट्टी की ताकत को बढ़ा सकते हैं और रासायनिक खेती से होने वाले मिट्टी के स्वास्थ्य के नुकसान के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभाव को भी रोक सकते हैं। उन्होंने बताया कि किसान फसल विविधीकरण तथा एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह ने बताया कि किस प्रकार शुरुआती समय में प्राकृतिक कृषि में कम उपज किसान को मिलती है लेकिन किसान भाई प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग लेकर अगर अच्छे तरीके से वैज्ञानिक ढंग के साथ खेती करते हैं तो इस समस्या से भी निजात पाया जा सकता है।
वरिष्ठ समन्वयक डॉ. नसीब सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जिले में किये जाने वाले कार्यों के बारे में विस्तार से बताया। कार्यक्रम का संचालन सस्य विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. सरिता रानी ने किया। केंद्र कुरुक्षेत्र से रिटायर्ड प्रोफेसर एवं पद्म विजेता डॉ. हरिओम ने प्राकृतिक खेती के महत्व एवं भविष्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जिले के अनुसूचित जाति के किसानों को फलों वाले पौधे भी बांटे। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. फतेह सिंह (पादप रोग विज्ञान) डॉ. मनोज कुमार (कृषि वानिकी), डॉ. ललिता रानी (गृहविज्ञान), डॉ. सरिता रानी (सस्य विज्ञान) और डॉ. कविता (मृदा विज्ञान) ने अपने अपने विषयों से संबंधित नवीनतम जानकारियां किसानों को दी।